दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की चर्चा इन दिनों जोरों पर है. सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कुछ देशों की ऐसी लिस्ट जारी की है जो अगले 74 साल यानी वर्ष 2100 तक पूरी तरह गायब हो सकते हैं. बढ़ते समुद्री जलस्तर के कारण ये देश और उनके बड़े इलाके डूबने की कगार पर है.

वैज्ञानिकों और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया तो कई कम ऊंचाई वाले द्वीपीय राष्ट्र और तटीय क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं. सबसे ज्यादा खतरा उन छोटे द्वीपीय देशों को है जिनकी औसत ऊंचाई समुद्र तल से सिर्फ 1 से 3 मीटर ऊपर है. युनाइटेड नेशन ने ऐसे देशों की लिस्ट जारी की है, जो आने वाले सालों में डूब जाएंगे.

नहीं बचेगा अस्तित्व
जो देश गायब हो जाएंगे उसमें तुवालु, किरिबाती, मालदीव, मार्शल द्वीप और नाउरू प्रमुख हैं. तुवालु और किरिबाती के कई द्वीप पहले ही समुद्र में विलीन हो चुके हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर वर्तमान रफ्तार जारी रही तो 2100 तक इन देशों का बड़ा हिस्सा या पूरा देश पानी में डूब सकता है. मालदीव दुनिया का सबसे कम ऊंचाई वाला देश है. यहां की 80 प्रतिशत से ज्यादा भूमि समुद्र तल से सिर्फ एक मीटर ऊपर है. पर्यटकों का स्वर्ग माने जाने वाले मालदीव के कई रिसॉर्ट द्वीप पहले ही खतरे में है. सरकार पहले से ही नई कृत्रिम द्वीप बनाने और लोगों को ऊंचे इलाकों में बसाने की योजना बना रही है. बांग्लादेश भी बेहद जोखिम में है. देश का बड़ा हिस्सा गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा पर बसा है. बढ़ते जलस्तर और तूफानों से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि 2100 तक बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में करोड़ों लोग बेघर हो सकते हैं.

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