भारतीय समाज में मिडल क्लास लोगों की हर वक्त आॢथक हालत तंग रहना एक आम बात हो गई है। उनकी इस तंगी के लिए महंगाई के अलावा उनकी खुद की गलतियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। ये कौन-सी गलतियां हैं, जो उनकी पैसों की तंगी खत्म नहीं होने देतीं? सबसे पहले तो मिडल क्लास की सबसे बड़ी दिक्कत पैसा कम कमाना नहीं, बल्कि कमाए हुए पैसे को गलत जगह फंसाना है। इनकी पहली गलती है दिखावे पर खर्च करना। महंगा फोन, कर्जे पर बड़ी गाड़ी, महंगी शादी, टौरबाजी पर खर्चा इत्यादि ये सब समाज को दिखाने के लिए लिया जाता है। लोन की किस्त भरते-भरते कई साल निकल जाते हैं और कुछ भी पास नहीं बचता। बुद्धिमान लोग पहले आमदनी के जरिए बनाते हैं, फिर उससे लाइफस्टाइल खरीदते हैं। मिडल क्लास उल्टा करती है, यह क्लास पहले लाइफस्टाइल बनाती है, फिर जिंदगी भर उसकी लागत चुकाती है।

दूसरी गलती है एक ही इंकम सोर्स पर टिके रहना। नौकरी गई तो पूरा घर हिल जाता है। साइड इंकम, स्किल, फ्रीलांस, छोटा बिजनैस, इन पर ध्यान नहीं दिया जाता क्योंकि उनके पास इन कामों के लिए ‘टाइम नहीं है’। परंतु वैब सीरीज, टी.वी. पर मैच देखने और बेवजह मोबाइल चलाने के लिए,  फिजूल की चीजों पर पैसा उड़ाने के लिए टाइम है।
मिडल क्लास की तीसरी बड़ी गलती है सेविंग को निवेश समझना। फिक्स डिपॉजिट, सेविंग अकाऊंट, या सोना लॉकर में रखकर लगता है पैसा सेफ है। यह बुरा नहीं है, पर महंगाई 6 प्रतिशत है और फिक्स डिपॉजिट 7 प्रतिशत दे रहा है। टैक्स काटकर रिटर्न नैगेटिव हो जाता है। इस तरह पैसा बढ़ता नहीं, धीरे-धीरे घटता है। हो सकता है इक्विटी, रियल एस्टेट, स्किल में पैसा लगाने का डर मिडल क्लास को कमजोर रखता हो। चौथी गलती है इंश्योरैंस और एमरजैंसी फंड न रखना। एक मैडिकल बिल या जॉब लॉस सारी सेविंग खा जाता है। फिर पर्सनल लोन, क्रैडिट कार्ड के जाल में फंस जाते हैं। 6 महीने का खर्च अलग रखना और 25 लाख का हैल्थ कवर बेसिक है, पर ज्यादातर लोग इसे टालते हैं। पांचवीं गलती है बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए बेवजह कर्ज लेना। एजुकेशन लोन तो ठीक है, पर प्राइवेट कॉलेज में 40 लाख फीस देकर 30 हजार की नौकरी मिले तो क्या ठीक है? आजकल शादी में दिखावे के लिए जायदाद बेच देना, मोटा कर्ज लेना इत्यादि क्या बुद्धिमता है?

छठी गलती है मिडल क्लास में वित्तीय साक्षरता की कमी होना। टैक्स बचाने के लिए बेकार बीमा पॉलिसी ले लेना, दोस्त की सलाह पर शेयर में पैसा फंसाना या कमेटी और चिट फंड में उलझ जाना। हम समझ लें कि पैसा कमाने से ज्यादा जरूरी है पैसे की ठीक तरीके से  संभाल करना सीखना, पर स्कूल-कॉलेज में यह कोई ज्यादा सिखाता नहीं। मिडल क्लास के लोग अच्छा कमाने के बाद भी पैसे की दिक्कत में इसलिए रहते हैं क्योंकि इंकम बढऩे से पहले लाइफस्टाइल बढ़ जाता है। इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन बोलते हैं। पहले 40 हजार कमाते थे तो स्कूटी से काम चलता था, 1 लाख होने पर लगता है कार तो जरूरी है। फिर कार ली तो किस्त आई, पैट्रोल, मेंटेनैंस, पार्किंग का खर्चा अलग। यदि सैलरी बढ़ कर हुई 70 हजार, खर्चा बढ़ गया 95 हजार, तो इससे कुछ भी नहीं सुधरता।

आजकल मिडल क्लास के ज्यादातर लोगों को पैसा नियंत्रित करना नहीं आता। पैसा कमाना एक स्किल है और बचाना, इन्वैस्ट करना दूसरी जरूरी स्किल। हम स्कूल-कॉलेज में सब कुछ पढ़ते हैं, पर व्यापार के छात्रों के अतिरिक्त अन्य छात्रों को बजट बनाना, टैक्स सेव करना, एमरजैंसी फंड रखना कोई नहीं सिखाता। ये स्किल्स ज्यादा जरूरी हैं। आॢथक योजना की कमी के कारण भी अनेक अच्छी सैलरी वाले लोग सोचते हैं कि अभी तो आ रहा है, बाद में बचा लेंगे। पर बचाने वाला कल कभी भी नहीं आता है। असल में मिडल क्लास आॢथक दृष्टि से कमजोर नहीं, बस उनके पैसे का प्रबंध ठीक नहीं होता। जब तक हम खर्च से पहले निवेश नहीं करेंगे,  फिजूल खर्ची से किनारा नही करेंगे, तब तक आॢथक हालत नहीं सुधरेगी।-डा. वरिन्द्र भाटिया    

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