भोपाल में सामने आया किडनैपिंग का मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. पहले बदमाशों ने IAS की तैयारी कराने वाली एक प्रतिष्ठित एकेडमी की डायरेक्टर को सेमिनार और नए सेंटर के नाम पर भोपाल बुलाया गया, फिर उन्हें पिस्टल की नोक पर बंधक बनाकर करीब 1.89 करोड़ रुपये की लूट को अंजाम दिया गया. आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए दो महीने तक पूरी साजिश रची और ऐसा माहौल बनाया कि पीड़िता शोर भी न मचा सके.  

दो महीने की तैयारी, हर पहलू पर साजिश

जांच में सामने आया कि इस किडनैपिंग और लूट की योजना करीब दो महीने पहले ही बना ली गई थी. मुख्य आरोपी प्रियंक शर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर हर कदम पहले से तय किया. पीड़िता को भरोसे में लेने के लिए बड़े कोचिंग सेंटर और सेमिनार का झांसा दिया गया, ताकि उन्हें बिना शक के दिल्ली से भोपाल बुलाया जा सके.

फ्लैट में रची गई वारदात की पूरी पटकथा

आरोपियों ने जिस फ्लैट में पीड़िता को बंधक बनाया, उसे वारदात से एक दिन पहले बागसेवनिया में किराये पर लिया गया था. खास बात यह रही कि उसी फ्लैट में घटना वाले दिन सुंदरकांड का पाठ करवाया गया. आरोपियों का मकसद था कि अगर पीड़िता चीखे या विरोध करे, तो उसकी आवाज बाहर तक न पहुंचे और किसी को शक न हो.

पीड़िता को डराने के लिए एक आरोपी को मरने की एक्टिंग सिखाई गई. इस दौरान ऐसा वीडियो भी बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति को रस्सी से बांधकर बक्से में बंद करने जैसा नाटक दिखाया गया. आरोपियों का उद्देश्य था कि पीड़िता पुलिस के पास न जाए और भविष्य में भी डर के साए में चुप रहे.

आरोपियों ने हथियार दिखाकर पीड़िता से जनकशिला सोसायटी और आरएस इंटरप्राइजेज से जुड़े खातों में कुल 1.89 करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए. यह पूरी रकम कुछ ही घंटों में अलग-अलग खातों में भेज दी गई. हालांकि पुलिस ने समय रहते खातों को फ्रीज करवा दिया, जिससे पूरी राशि सुरक्षित हो गई.

बीमारी का बहाना और ICU का ड्रामा

घटना के बाद मुख्य आरोपी प्रियंक शर्मा ने खुद को बचाने के लिए एक और चाल चली. उसने बीमारी का झूठा बहाना बनाकर एम्स अस्पताल के ICU में भर्ती होने का नाटक किया. पुलिस जब उसके पास पहुंची तो जांच में उसकी हालत सामान्य पाई गई. पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी की मां और पत्नी ने अस्पताल में हंगामा भी किया, लेकिन पुलिस ने आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया.

क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त के निर्देश पर क्राइम ब्रांच की टीम गठित की गई. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भोपाल और अन्य जिलों में लगातार दबिश दी गई. कुछ ही घंटों में मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और घटना में इस्तेमाल किए गए पिस्टल, वाहन और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए.

आरोपी और उनकी भूमिका

पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि प्रियंक शर्मा इस पूरे अपराध का मास्टरमाइंड था. उसके साथ भोपाल, दतिया और रीवा से बुलाए गए आरोपी शामिल थे, जिन्होंने हथियारों के बल पर वारदात को अंजाम दिया. एक आरोपी से पिस्टल भी बरामद की गई है. पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों और प्रियंक की पत्नी की भूमिका की भी जांच कर रही है.

पुलिस का कहना है कि ठगी और लूट की पूरी राशि को होल्ड कर लिया गया है और जल्द ही वह पीड़िता के खाते में वापस कर दी जाएगी. फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और फरार व संदिग्ध लोगों की तलाश भी की जा रही है. इस मामले ने भोपाल में अपराधियों की साजिशों की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रख दी है.

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