मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में हुई ताजा सैन्य झड़प ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सबसे पहले कच्चे तेल के बाजार पर दिखा, जहां शुक्रवार सुबह तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया। अगर तनाव ऐसे ही बढ़ता रहा, तो भारत जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।

तेल की सप्लाई पर पड़ेगा असर

शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। क्रूड ऑयल WTI 1.95 फीसदी या 1.85 डॉलर की बढ़त के साथ 96.66 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। वहीं, ब्रेंट क्रूड 1.60 फीसदी या 1.60 डॉलर की बढ़त के साथ 101.66 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। बाजार को डर है कि अगर हॉर्मुज में हालात और खराब हुए, तो तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

ईरान और यूएस के बीच हुई सैन्य झड़प

असल तनाव गुरुवार को शुरू हुआ था। ईरान की सेना के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने दो ईरानी जहाजों को निशाना बनाया। इनमें एक तेल टैंकर था, जो ईरान के जास्क बंदरगाह से हॉर्मुज की तरफ जा रहा था। दूसरा जहाज यूएई के फुजैराह पोर्ट के पास मौजूद था। दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उनके युद्धपोतों पर ईरान की तरफ से मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला किया गया, जिसके जवाब में अमेरिका ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने कहा कि उनके किसी भी युद्धपोत को नुकसान नहीं पहुंचा। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी सेना की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उधर ईरान की राजधानी तेहरान में भी धमाकों की खबर सामने आई है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक शहर के अलग-अलग हिस्सों में दो धमाके हुए। हालांकि, इन धमाकों में कितना नुकसान हुआ, इसकी साफ जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

अमेरिकी युद्धपोतों ने पार किया होर्मुज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित तरीके से हॉर्मुज पार कर गए और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि कई छोटी नौकाएं समुद्र में डुबो दी गईं और दागी गई मिसाइलों को भी हवा में ही नष्ट कर दिया गया। बाद में ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्धविराम अभी भी लागू है।

भारत के लिए आर्थिक खतरा

भारत के लिए यह तनाव सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि सीधा आर्थिक खतरा भी है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का असर पेट्रोल-डीजल से लेकर रसोई गैस और ट्रांसपोर्ट लागत तक हर जगह दिख सकता है। उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल सालाना करीब 16 हजार करोड़ रुपये बढ़ जाता है।

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में ग्लोबल ऑयल सप्लाई गुजरती है। इसलिए यहां तनातनी बढ़ते ही बाजार में घबराहट फैल जाती है। फिलहाल निवेशकों की नजर इसी बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हालात संभलते हैं या फिर टकराव और बढ़ता है।

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