हिंदू धर्म में महादेव को खुश करने के लिए प्रदोष व्रत को बहुत अच्छा माना जाता है। हर महीने आने वाली त्रयोदशी तिथि भगवान महादेव और माता पार्वती के मिलन और उनकी कृपा का त्योहार होती है। लेकिन मई 2026 के पहले प्रदोष व्रत को लेकर भक्तों में एक बड़ा सवाल है – क्या यह व्रत 14 मई को रखा जाए या 15 मई को? अगर आप भी इस सवाल में हैं, तो आइए पंडित से पंचांग की सही गणना और इस दिन के विशेष महत्व के बारे में जानते हैं।

14 या 15 मई: प्रदोष व्रत के निर्धारण में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय का बहुत महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन सूर्यास्त के समय त्रयोदशी तिथि होती है, उसी दिन यह व्रत रखा जाता है।

त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 14 मई 2026, सुबह 11:20 बजे से।
त्रयोदशी तिथि का समापन: 15 मई 2026, सुबह 08:31 बजे तक।

क्योंकि 15 मई की सुबह ही त्रयोदशी समाप्त हो जाएगी और 14 मई की शाम को त्रयोदशी तिथि पूरी तरह से प्रभाव में रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 14 मई, गुरुवार को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

इस बार का संयोग है बहुत खास: गुरु प्रदोष व्रत

मई का यह पहला प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जिसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत करने से न केवल भगवान शिव खुश होते हैं, बल्कि आपकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह भी मजबूत होता है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो शिक्षा, करियर या दुश्मनों पर जीत हासिल करना चाहते हैं।

क्या आप जानते हैं?

मई 2026 में एक नहीं बल्कि दो गुरु प्रदोष का दुर्लभ संयोग बन रहा है! पहला 14 मई को और दूसरा 28 मई को। ज्योतिषीय दृष्टि से यह उन लोगों के लिए बहुत शुभ है जो लंबे समय से पितृ दोष या बच्चों से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त (Pradosh Kaal)

महादेव की पूजा अगर सही समय पर न हो, तो उसका फल अधूरा रह जाता है। 14 मई को पूजा के लिए सबसे अच्छा समय यह है:

शुभ मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक।
कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 05 मिनट।

महादेव को कैसे करें प्रसन्न?

सुबह का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शिव मंदिर जाकर या घर पर ही व्रत का संकल्प लें।
शाम की मुख्य पूजा: सूर्यास्त से थोड़ा पहले दोबारा स्नान करें। भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से (पंचामृत) अभिषेक करें।
विशेष अर्पण: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, और शमी के पत्ते चढ़ाएं। गुरु प्रदोष होने के कारण इस दिन महादेव को पीले फूल और चने की दाल का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।

व्रत के लाभ: क्यों है यह इतना फलदायी?

स्कंद पुराण के अनुसार, जो भक्त प्रदोष के दिन शाम के समय शिव के मंदिर के दर्शन करता है या दीपदान करता है, उसके जीवन से गरीबी और बीमारियां दूर हो जाती हैं। मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष स्वास्थ्य देता है, तो गुरुवार का प्रदोष ज्ञान और दुश्मनों का नाश करता है।

भक्ति और विश्वास का यह संगम 14 मई को आ रहा है। अगर आप भी महादेव की शरण में जाना चाहते हैं, तो तिथियों के इस फेर को छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ 14 मई को व्रत रखें। आपकी हर इच्छा भोलेनाथ जरूर पूरी करेंगे।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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