नई दिल्ली| भारतीय रुपये (Rupee) में आ रही लगातार गिरावट के बीच उसे मजबूत बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Rupee Strategy) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां केंद्रीय बैंक रुपये पर दबाव बढ़ने पर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से डॉलर बेचकर बाजार को संभालता था, वहीं अब वह विदेश से नए डॉलर भारत लाने पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसके लिए एनआरआई जमा, विदेशी कर्ज और सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए गए हैं। हालांकि, इन प्रयासों से देश में अरबों डॉलर आए हैं, लेकिन रुपये की कीमत में अब तक कोई बड़ी मजबूती देखने को नहीं मिली है।
पहले RBI कैसे बचाता था रुपया?
जब भी रुपये पर दबाव बढ़ता था और डॉलर महंगा होने लगता था, तब RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता था। इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ती थी और रुपये की गिरावट पर कुछ हद तक रोक लग जाती थी। लेकिन इस रणनीति की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि हर बार डॉलर बेचने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जाता था। ऐसे में भविष्य में संकट आने पर RBI के पास हस्तक्षेप करने की क्षमता भी घट सकती थी।



















