भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में इतिहास रचते हुए पहली बार भव्य शिखर पर कुंभाभिषेक किया गया. 11 पवित्र तीर्थों के जल से 90 मीटर ऊंचे शिखर का अभिषेक हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. यह खास आयोजन सोमनाथ अमृत पर्व-2026 के तहत मंदिर के 75 साल पूरे होने पर किया गया.

पीएम मोदी ने सोमनाथ में कहा कि जब मैं पिछली बार यहां आया था, तब मैंने कहा था कि जिसके नाम में ही सोम अर्थात अमृत जुड़ा हो, उसे कौन नष्ट कर सकता है. इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने अनेक आक्रमण झेले. महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आए.

उस दिन दुनिया में तूफान आ गया जब…सोमनाथ अमृत महोत्सव में पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है. 11 मई, 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए. हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा. दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें.

1.86 टन कलश से जलाभिषेक
सोमनाथ मंदिर के 155 फीट ऊंचे शिखर पर 1.86 टन का कलश विशेष क्रेन से चढ़ाया जाएगा. अभिषेक के लिए 1100 लीटर क्षमता वाला एक विशेष कलश तैयार किया गया है, जिसका वजन खाली होने पर 760 किलोग्राम और जल भरने पर लगभग 1.86 टन हो जाता है. इसमें आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया गया है. मंदिर की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए 350 टन की एक विशाल ऑल-टेरेन क्रेन का उपयोग किया गया है ताकि मंदिर की संरचना पर कोई सीधा भार न पड़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मंदिर के शिखर पर नूतन ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी होगा.

शिखर का जलाभिषेक क्यों
सोमनाथ मंदिर में जो पहली बार जलाभिषेक किया जा रहा है उसका विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, मंदिर का शिखर और उस पर स्थित कलश ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करने का केंद्र होता है. माना जाता है कि समय के साथ और प्राकृतिक आपदाओं या झंझावातों के कारण मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा में कमी आती है.

कुंभाभिषेक के माध्यम से पवित्र नदियों के जल और मंत्रोच्चार से उस ऊर्जा को पुनर्जीवित किया जाता है. इसके साथ ही मान्यता है कि शिखर दर्शनं पाप नाशनम् यानी शिखर के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है. इसलिए शिखर का अभिषेक पूरे मंदिर की पवित्रता को चरम पर ले जाता है. वहीं आज का दिन सोमनाथ मंदिर के लिए ऐतिहासिक दिन है. 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आधुनिक सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की थी. आज उस घटना के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जा रहा यह अभिषेक उस ऐतिहासिक विरासत को आगे ले जाने और आधुनिक भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का प्रतीक है.

गजनी द्वारा मंदिर के ध्वस्त करने के 1000 साल पूरे
आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज से 1000 साल पहले सन 1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त किया था. 2026 में उस दुखद घटना के 1000 साल पूरे हो रहे हैं. शिखर का यह भव्य अभिषेक दुनिया को यह संदेश देता है कि सोमनाथ यानी जो अमर है, हर विनाश के बाद और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा होता है. इसलिए इसे स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है.

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031