अमरावती: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मांग की है कि इस्कॉन के प्रचारक चिन्मय कृष्ण दास प्रभु को जमानत दी जाए, जिन्हें बांग्लादेश में अरेस्ट किया गया था। यह देखते हुए कि वे 500 से ज्यादा दिनों से जेल में बंद हैं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से उन्हें मेडिकल सहायता देने का आग्रह किया। उन्होंने अपील की कि कम से कम इस चरण पर तो उन्हें जमानत दे दी जाए। पवन कल्याण ने ट्वीट करते हुए पूछा कि अगर जो वकील उनकी तरफ से बहस करने के लिए आगे आते हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है, तो फिर न्याय के बारे में कोई क्या ही कह सकता है?

पवन कल्याण ने क्या कहा?

जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आध्यात्मिक गुरु और इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु बांग्लादेश में जेल की सलाखों के पीछे हैं। एक ऐसी स्थिति जिसे पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने न्याय की अवधारणा पर ही सवाल उठाते हुए पूछा कि हम किस न्याय की बात कर सकते हैं, जब संत के वकीलों को भी अदालत परिसर के अंदर ही धमकाया, डराया और चुप कराया जा रहा है।

पवन कल्याण ने उठाए सवाल
उन्होंने अधिकारियों को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के अधिकारों की वकालत करना ही संत का एकमात्र अपराध था। पवन कल्याण ने ट्वीट किया कि जब भगवा वस्त्र पहने कोई व्यक्ति अपनी आवाज उठाता है और उसके बाद उसके साथ एक अपराधी जैसा बर्ताव किया जाता है, तो दुनिया चुप नहीं रह सकती। पवन कल्याण ने मांग की कि चिन्मय कृष्ण दास प्रभु को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।

बांग्लादेश सरकार से की अपील
पवन कल्याण ने बांग्लादेश सरकार से अपील की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें निष्पक्ष न्याय मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिन्मय कृष्ण दास को जल्द से जल्द जमानत दी जाए। इसके अलावा पवन कल्याण ने नकली धर्मनिरपेक्षतावादियों और कुछ पक्षपाती मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की इस मामले पर चुप रहने के लिए आलोचना की। इस बीच यह एक ज्ञात तथ्य है कि बांग्लादेश सरकार ने 2024 में चिन्मय कृष्ण दास को राजद्रोह के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

किस आरोप में अरेस्ट हैं चिन्मय कृष्ण दास?
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में इस्कॉन के प्रचारक के रूप में कार्य करते हैं। हालांकि चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ आरोप सामने आए, जिसमें उन पर नवंबर 2024 में देश में आयोजित एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 25 नवंबर, 2024 को चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। हालांकि स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने एक वकील पर हमला कर दिया, जो उस समय उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए आगे आए थे। इस घटना के बाद एक और वकील को भी इसी तरह की धमकियों का सामना करना पड़ा।

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