अप्रैल माह में थोक महंगाई दर 8.30 फीसदी हो गई, जो मार्च में 3.88 फीसदी थी। बीते 42 माह में यह महंगाई का उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई की महंगाई दर 9 फीसदी को पार कर सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अधिकतम महंगाई की जो सीमा तय कर रखी है, उसके मुताबिक मुद्रास्फीति 6 फीसदी से नीचे रहनी चाहिए, लेकिन अब आसार 9-10 फीसदी के बन रहे हैं। यकीनन अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। वित्तीय, राजकोषीय और चालू खाता घाटे बढ़ सकते हैं। औसत उपभोक्ता के लिए ईएमआई और ब्याज दरों का बोझ बढ़ेगा। जिस देश के नेता, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल साईकिल, बुलेट, ई-रिक्शा, रेल पर सवार दिख रहे हों और देश के आर्थिक संकट का ‘मजाक’ बना रहे हों, प्रधानमंत्री के आह्वान का अपमान कर रहे हों, उनके लिए महंगाई कोई चिंतित मुद्दा नहीं है, लेकिन आम आदमी के लिए मरने-जीने का सवाल है। नेतागण ‘नौटंकी’ करना छोड़ दें, क्योंकि उनकी गतिविधियों से संकट हल होने वाला नहीं है। यदि सुरक्षा कोई संवेदनशील मुद्दा नहीं है और संकट विकराल है, तो मंत्रीगण पैदल चलें। ये दृश्य हास्यास्पद् हैं। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार भी इसे दहशत और चिंता की बात नहीं मानते। बहरहाल यह महंगाई सिर्फ ईरान युद्ध की देन नहीं है। बेशक कच्चे तेल के बढ़ते दाम भी महत्त्वपूर्ण कारक हैं, लेकिन कुछ और विसंगतियां भी हैं, जिनके कारण थोक महंगाई दर इतनी बढ़ी है। यदि थोक महंगाई की स्थिति यह है, तो अंतत: खुदरा महंगाई दर भी अपनी मानक सीमा तोड़ कर बढ़ सकती है। नतीजतन आम आदमी की जेब ही कटेगी। देश की 90 फीसदी से अधिक कामगार जमात असंगठित है। उसमें मजदूर, किसान भी, दिहाड़ीदार, अस्थायी ठेकों पर काम करने वाले और असंख्य बाल-मजदूर आदि शामिल हैं। जो जमात औसतन 10-12 हजार रुपए महीना ही कमा पाती है, उसके घर में 3000-3500 रुपए का रसोई गैस सिलेंडर कैसे खरीदा जा सकता है? कालाबाजारी में सिलेंडर इसी दाम पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। सरकारी संरक्षण के बिना ‘कालाबाजार’ चल ही नहीं सकता? यह वाकई शोध का विषय है।

इससे ‘उज्ज्वला’ की विसंगतियां भी बेनकाब होंगी। कहां है युद्ध और ऊर्जा का संकट? गैस का बड़ा सिलेंडर 1300 रुपए महंगा हो चुका है। आयातित दालें 35 फीसदी, खाद्य तेल 15 रुपए, मेवे 80 फीसदी, दूध 2-5 रुपए प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। चावल, चीनी, आटा, गेहूं, अंडा, मांस, मछली आदि भी महंगे बिक रहे हैं। सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक क्यों लगाई है? निर्यात तो पहले ही बिखर चुका है। बेशक प्याज, टमाटर, आलू की कीमतें शांत हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के उत्पाद 4.62 फीसदी महंगे हुए हैं। इस क्षेत्र की बाजार में 64 फीसदी हिस्सेदारी है और सूक्ष्म स्तर पर सर्वाधिक रोजगार भी इसी क्षेत्र में है। मुंबई में सीएनजी 2 रुपए महंगी कर दी गई है, जहां 12 लाख से अधिक वाहन सीएनजी इस्तेमाल करते हैं। अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि आम आदमी के लिए महंगाई दर 8-9 फीसदी नहीं, बल्कि 30-40 फीसदी है, क्योंकि उसकी आमदनी बेहद सीमित है और वह ‘कालाबाजार’ का शिकार है। इस संदर्भ में भी रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आगाह किया है कि यदि मध्य-पूर्व का संकट नहीं थमा, तो महंगाई और बढ़ेगी। तेल-गैस और खाद की किल्लत बढ़ेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार कुछ छिपा रही है, क्योंकि भारत के पास ऐसा कोई ‘करिश्मा’ नहीं है कि वह ईरान युद्ध से बेअसर रह सके। लंबे वक्त तक पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम न बढ़ाए जाएं। सरकार और तेल कंपनियां कब तक घाटा झेलती रहेंगी। देश पर पहले से ही 200 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कजऱ् है। बहरहाल आजकल सोने की खूब चर्चा है। वैसे वह भी महंगाई का हिस्सा है और 10 ग्राम सोने के दाम 1.55 लाख रुपए से ज्यादा हो चुके हैं। एक रपट सामने आई थी कि हमारे सांसदों के पास 710 किग्रा सोना है। उन्होंने पैसा और ब्याज की पेशकश के बावजूद सोना सरकार को नहीं सौंपा। यह भी अनुमान है कि भारत में मंदिरों, मठों, घरों में करीब 50,000 टन सोना रखा है। वह 830 लाख करोड़ का आंका गया है। यदि सरकार गंभीर है, तो इस सोने का अधिग्रहण करे। कई संकट हल हो सकते हैं।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031