दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन (IIMC) में हिंदी-उर्दू का विवाद गहरा गया है. IIMC में उर्दू पत्रकारिता कोर्स की प्रवेश परीक्षा को लेकर विवाद दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. परीक्षा की भाषा और लिपि को लेकर छात्रों की शिकायत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने संस्थान को नोटिस जारी किया है और एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है. इस मामले ने एक बार फिर से हिंदी और उर्दू भाषा के बीच की एक नई बहस को शुरू कर दिया है.
मामला उर्दू पत्रकारिता के पीजी डिप्लोमा कोर्स की प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है. छात्रों का कहना है कि IIMC ने 27 अप्रैल को जारी नोटिस में साफ कहा था कि परीक्षा उर्दू और देवनागरी दोनों लिपियों में दी जा सकती है. इसके बाद अचानक 6 मई को नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. इस नोटिफिकेशन में कहा गया कि परीक्षा सिर्फ उर्दू लिपि में ही होगी.
छात्रों की बढ़ी चिंता
हिंदी या देवनागरी का कोई जिक्र नहीं किया गया. याचिका दायर करने वाले छात्रों का कहना है कि कई अभ्यर्थियों ने पहले वाले नियम के आधार पर फीस जमा की थी और तैयारी भी उसी हिसाब से की थी. छात्रों का कहना है कि अब अचानक नियम बदलने से उनकी चिंताएं बढ़ गी हैं क्योंकि इससे उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है.
भाषा, समान अवसर और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मुद्दा – वकील
छात्रों की ओर से पेश वकील अभिषेक ने अदालत में कहा कि यह सिर्फ परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि भाषा, समान अवसर और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कोर्ट से छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील फैसला लेने की मांग की है. ऐसे में देखना है कि दिल्ली हाई कोर्ट के नोटिस के बाद संस्थान अपना क्या जवाब देता है.



















