जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे-भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा? हमारे गरीब और वंचित भाई-बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं।
मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।’ मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। पिछले एक दशक में मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारा देश जबरदस्त ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। अब हमें अपनी आंखों के सामने तिरुवल्लुवर के इन शब्दों की सच्चाई देखने का अवसर मिल रहा है, ‘जो अपने संकल्प में अडिग रहते हैं, वे ठीक वही हासिल करते हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना की होती है।’
ऐसे समय में, जब पूरी दुनिया आॢथक मंदी और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती और तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारा देश आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा आर्थिक विकास समावेशी रहा है। पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ भारतवासी अत्यधिक गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हुए हैं। अब तक भारत में गरीब और बेघर लोगों के लिए लगभग 4 करोड़ पक्के घर बनाए जा चुके हैं। 12 करोड़ से अधिक लोगों को पाइप से पीने के पानी का कनैक्शन उपलब्ध कराया गया है। हमने खुले में शौच से मुक्त राष्ट्र बनने का संकल्प लिया था और केवल 60 महीनों के भीतर देश ने 60 करोड़ लोगों के लिए यह लक्ष्य हासिल कर दिखाया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को हर वर्ष 5 किलो खाद्यान्न मुफ्त दिया जा रहा है, जिस पर 2.3 लाख करोड़ रुपए का खर्च किया जा रहा है। आज देश इस संकल्प के साथ आयुष्मान भारत योजना चला रहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक पहुंचें। इसी का परिणाम है कि अब 44 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है।
हमारे किसानों ने अपनी मेहनत से 35 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन किया है, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक देश बन गया है। भारत अब चावल उत्पादन में भी दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है और अपने निर्यात के माध्यम से दुनिया से जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। आज हमारी नारी शक्ति के लिए देश के विकास में पूरी भागीदारी के अवसर खुल रहे हैं। 3 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बन चुकी हैं। अब महिलाएं सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन भी प्राप्त कर रही हैं और युद्धक भूमिकाओं में भी भाग ले रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में उनकी भागीदारी को और मजबूत करेगा।
युवाओं के लिए पिछले 10 वर्षों में ही 13 नए आई.आई.टी. स्थापित किए गए हैं, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह आई.आई.एम. की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो चुकी है और मैडीकल कालेजों की संख्या 37 से बढ़कर 823 हो गई है। यह गर्व की बात है कि मैडीकल छात्रों के लिए सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,29,603 हो गई है। हम विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय रेलवे का लगभग 99 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। देशभर में 164 वंदे भारत एक्सप्रैस ट्रेनों ने रेल यात्रा के एक नए युग की शुरुआत की है। हवाई अड्डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 163 हो गई है और उड़ान योजना के तहत आम लोगों के लिए हवाई यात्रा सुलभ हुई है।
विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में देश ने जो प्रगति हासिल की है, वह हम सभी को गर्व से भर देती है। तकनीक से लेकर चिकित्सा तक, हर क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई और स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर बहुत कम समय में सभी को मुफ्त उपलब्ध कराई। भारत ने मानवीय संवेदना के साथ दुनिया के 100 से अधिक देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। चंद्रयान-3 की सफल लांचिंग ने भारत को उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान के नए युग में पहुंचा दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां भारत को अपना केंद्र बना रही हैं, जिससे निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। भारत अब सैमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मॉडल बनकर उभर रहा है। मोबाइल फोन उत्पादन में भी हमने विश्व में दूसरा स्थान हासिल किया है। भारत आज 300 करोड़ अमरीकी डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन निर्यात करने वाला देश बन चुका है।
कई दशकों तक हमारे देश ने केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि उग्रवाद और वामपंथी चरमपंथ जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। साहसिक नीतिगत फैसलों और कानून के सख्त पालन के माध्यम से आज देश में शांति स्थापित हुई है और इन क्षेत्रों में विकास के द्वार खुले हैं। हमने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2047 तक यानी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक, भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बने और दुनिया का मार्गदर्शन करने की स्थिति में पहुंचे। कठिन परिश्रम का यह दौर ही ‘अमृत काल’ है। स्वामी विवेकानंद के ये शब्द हमें प्रेरणा देते हैं और दिशा भी दिखाते हैं, ‘मेरे भाइयो, आइए हम सब मिलकर कड़ी मेहनत करें। यह सोने का समय नहीं है। भारत का भविष्य हमारे प्रयासों पर निर्भर करेगा।’ –सी.पी. राधाकृष्णन (भारत के उपराष्ट्रपति)



















