ट्रेन से आपने कभी न कभी तो जरूर सफर किया होगा, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ट्रेन के आखिरी डिब्बे के पीछे पीले या सफेद रंग का X का निशान बना होता है? दरअसल, यह साइन हर ट्रेन के आखिरी डिब्बे के पीछे बना होता है और सुरक्षा में बहुत अहम भूमिका निभाता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि भला एक छोटा-सा निशान सुरक्षा में क्या भूमिका निभा सकता है। आइए बताते हैं कि ट्रेन के आखिरी डिब्बे के पीछे लिखे X का मतलब क्या है।
ट्रेन के पीछे X मार्क होने की वजह
रेलवे के लिए यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम है। ट्रेन के आखिरी कोच पर बने X के निशान का मकसद स्टेशन मास्टर और रेलवे अधिकारियों को यह बताना है कि पूरी ट्रेन स्टेशन से सुरक्षित तरीके से गुजर चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो, यह इस बात का सबूत है कि ट्रेन का कोई भी डिब्बा रास्ते में छूट नहीं गया है। अगर किसी स्टेशन से ट्रेन गुजरती है और स्टेशन मास्टर को आखिरी डिब्बे पर यह X नहीं दिखता, तो यह तुरंत खतरे का संकेत माना जाता है।
रात के समय यह कैसे काम करता है?
दिन के उजाले में तो X का निशान आसानी से दिख जाता है, लेकिन रात के अंधेरे या कोहरे में क्या होता है? इसके लिए रेलवे खास व्यवस्था करता है। ट्रेन के आखिरी डिब्बे पर X के ठीक नीचे एक लाल रंग की LED लाइट लगी होती है।
यह लाइट लगातार झपकती रहती है। धुंध या रात के समय, यह लाइट रेल कर्मचारियों को संकेत देती है कि यह ट्रेन का अंतिम सिरा है और पूरी गाड़ी सुरक्षित रूप से ट्रैक पर मौजूद है।
LV बोर्ड का क्या मतलब है?
X के निशान के साथ आपने अक्सर एक छोटा सा बोर्ड देखा होगा जिस पर LV लिखा होता है। यह पीले रंग के बोर्ड पर काले अक्षरों में लिखा होता है।
LV का मतलब है Last Vehicle। यह X मार्क के जैसा ही एक संकेत है। नियम के अनुसार, हर ट्रेन के आखिरी कोच पर LV का बोर्ड होना जरूरी है, ताकि सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की कन्फ्यूजन न हो।
अगर X का निशान न दिखे, तो क्या होगा?
यह एक आपातकालीन स्थिति है। अगर किसी स्टेशन से ट्रेन गुजरती है और उसके आखिरी डिब्बे पर न तो X है, न ही LV बोर्ड और न ही ब्लिंकिंग लाइट, तो इसका सीधा मतलब है कि ट्रेन के कुछ डिब्बे बीच रास्ते में ही अलग होकर पटरी पर छूट गए हैं। ऐसी स्थिति में रेलवे तुरंत एक्शन लेती है।



















