Vibhuvana Sankashti Chaturthi: विभुवन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह पर्व वर्ष भर में आने वाली 12 संकष्टी चतुर्थियों में सबसे विशेष और दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह केवल तीन वर्ष में एक बार आता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में पड़ता है, जो प्रत्येक तीन वर्ष बाद आता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और व्रत करने से जीवन के कष्ट एवं संकट दूर होते हैं तथा सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
पूजा सामग्री
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
- पीला या लाल कपड़ा
- दूर्वा घास
- लाल फूल
- अक्षत (चावल)
- रोली
- कुमकुम
- पीला चंदन
- धूप
- अगरबत्ती
- दीपक
- कपूर
- घी
- कलश
- गंगाजल
- पान के पत्ते
- सुपारी
- लौंग और इलायची
- कलावा
- फल
- मिठाइयां
- लोटा (तांबे, पीतल या चांदी का)
पूजा की विधि
पूजा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. गणेश जी को रोली और चंदन का तिलक लगाएं तथा 21 दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें.
इसके बाद धूप, अगरबत्ती और दीपक प्रज्ज्वलित करें. भगवान गणेश को अक्षत, फूल, फल, मिठाई, लौंग-इलायची एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. फिर गणेश मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें. पूजा के दौरान विभुवन संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें. अंत में कपूर या दीपक से भगवान गणेश की आरती करें. रात्रि में चंद्रदेव के दर्शन होने पर लोटे में जल, दूध और चंदन मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें.



















