Swachh Sabarmati Maha Abhiyan 2026:गुजरात के अहमदाबाद में मानसून से पहले साबरमती नदी के शुद्धिकरण और पर्यावरण संरक्षण के लिए दो जून को ‘स्वच्छ साबरमती महाअभियान 2026’ नाम से एक मेगा सफाई अभियान शुरू किया गया, जो पर्यावरण दिवस अर्थात पांच जून तक चलेगा. इस अभियान के प्रति लोगों में इतना उत्साह है कि पहले ही दिन साढ़े सात हजार से अधिक नागरिकों, स्वयंसेवकों ने भाग लेकर नदी के तल से लगभग 68 टन कचरा इकट्ठा किया. साबरमती ही नहीं, देश की सैकड़ों नदियों में मानसून के आगमन के पूर्व नदियों की सफाई किए जाने का चलन सा बन गया है.

पर्यावरण दिवस पर तो खासतौर पर सब लोग साफ-सफाई में भिड़कर उसकी फोटो सोशल मीडिया में डालते हैं. लेकिन महज एक दिन या कुछ दिनों की सफाई से क्या सचमुच नदियों की सेहत पर फर्क पड़ता है? अगर पड़ता होता तो हर साल यही कवायद दोहराने की नौबत क्यों आती? आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में सरकार देश के 145 से अधिक शहरों में शहरी नदी पुनरुद्धार की कार्ययोजना पर काम कर रही है.

नमामि गंगे कार्यक्रम तो वर्ष 2014 से ही जारी है और अब तक इस मिशन पर लगभग 27 हजार करोड़ रु. खर्च किए जा चुके हैं. सफाई के इन अभियानों से स्वच्छता आती भी है लेकिन जब कार्यक्रम बंद कर दिया जाएगा तो क्या गारंटी है कि नदियां पहले से भी ज्यादा प्रदूषित नहीं हो जाएंगी? हकीकत तो यह है कि नदियों को हम सिर्फ प्रदूषित करना बंद कर दें तो वे अपने आप स्वच्छ हो जाएंगी,

किसी सफाई अभियान की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. अभी हो यह रहा है कि एक तरफ तो हम नदियों की सफाई का दिखावा करते हैं, उसके लिए भारी-भरकम बजट आवंटित होता है और दूसरी तरफ जितनी सफाई नहीं होती उससे ज्यादा उसमें कचरा डालते जा रहे हैं.  कपड़ा, चमड़ा और रासायनिक फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी जहां बिना उपचार किए सीधे नदियों में छोड़ दिया जाता है,

वहीं  शहरों और गांवों के घरों से निकलने वाला मल-मूत्र और साबुन का गंदा पानी भी नदियों के जल को दूषित करता है. खेतों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक भी बारिश के पानी के साथ बहकर नदियों में मिल जाते हैं. जैसे-जैसे देश में औद्योगीकरण बढ़ रहा है, जाहिर है कि वैसे-वैसे नदियों में प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ती जा रही है.

इस मामले में हमें विकसित देशों से सीख लेनी चाहिए जहां उद्योगों और व्यक्तियों द्वारा नदी में कचरा या प्रदूषित पानी डालने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है. शहरों के गंदे पानी और सीवेज को नदियों में छोड़ने से पहले एडवांस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पूरी तरह से साफ किया जाता है तथा उद्योगों के लिए अनिवार्य किया जाता है कि वे अपने जहरीले पानी को रीसाइकल करें और उसे किसी भी स्थिति में प्राकृतिक जल स्रोतों में न छोड़ें.  नदियों में सेंसर लगाए जाते हैं जो चौबीसों घंटे पानी की गुणवत्ता, जैसे पीएच स्तर, ऑक्सीजन और रसायनों की मात्रा की निगरानी करते हैं.

जब तक हम नदियों में प्रदूषण के स्रोतों पर ही लगाम नहीं कसेंगे, तब तक नदियों की सफाई की कोशिशों को कोई खास सफलता नहीं मिलेगी और किसी दिन विशेष पर या कुछ दिनों के लिए उनकी सफाई के अभियान दिखावा बनकर रह जाएंगे.  

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30