कोच्चि : केरल में पेराम्ब्रा सीट से हाल ही में विधानसभा चुनाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की पहली महिला विधायक जीतीं। यह हैं फातिमा तहिलिया। फातिमा तहिलिया चुनाव जीतने के बाद खूब चर्चा में आईं। हालांकि एक बार फिर वह खबरों में हैं। इस बार मुस्लिम धर्मगुरुओं की आलोचना के चलते फातिमा सुर्खियां बन गई हैं। यह आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने पिछले हफ़्ते एक स्थानीय रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान ‘निलाविलक्कु’ (पारंपरिक तेल का दीपक) जलाया था।

अपनी सुप्रीम कंसल्टेटिव काउंसिल की बैठक के बाद, ‘समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा’ ने फातिमा का विरोध किया। खास बात है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं का यह संगठन पारंपरिक रूप से फातिमा तहिलिया की पार्टी IUML का समर्थक माना जाता है।

मुस्लिम संगठन बोले- दीप जलाना हराम

समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा ने कहा कि पारंपरिक तेल का दीपक जलाना गैर-मुसलमानों की परंपरा है। संगठन का दावा है कि अगर कोई मुसलमान गैर-मुसलमानों की उन मान्यताओं के आधार पर ऐसा काम करता है जो इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ हैं, तो ऐसा करने से वह व्यक्ति इस्लाम से बाहर हो सकता है। हालांकि, मुस्लिम संगठन ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी मान्यताओं को मानता या उन पर आधारित होकर यह काम नहीं करता, बल्कि सिर्फ़ गैर-मुसलमानों की नकल के तौर पर ऐसा करता है, तो भी इस काम को मना (हराम) और गुनाह माना जाता है।

‘इस्लाम माननेवाले को दूसरे धर्म की परंपराएं मानने की मनाही’

समस्त केरल जमिय्यतुल उलमा के प्रमुख नेता अब्दुल हमीद फैज़ी अंबालाक्कदावु ने इससे संबंधित एक पोस्ट फेसबुक पर लिखी। उन्होंने कहा कि इस्लामी कानून साफ, सटीक और स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने मानने वालों को दूसरे धर्मों की परंपराओं का पालन करने और उन्हें निभाने से सख्ती से मना किया है।

कौन हैं फातिमा तहिलिया

फातिमा तहिलिया IUML में सुधारवादी आवाज के तौर पर जानी जाती हैं और उन्होंने पार्टी के अंदर महिलाओं के लिए ज्यादा जगह बनाने की लड़ाई लड़ी है। हाल के विधानसभा चुनावों में, उन्होंने CPI(M) की केंद्रीय समिति के सदस्य और LDF संयोजक टी.पी. रामकृष्णन को उनकी पेराम्ब्रा सीट पर हराया था। उनकी उम्मीदवारी का विरोध रूढ़िवादी गुटों ने किया था, जिसमें ‘समस्था’ का एक धड़ा भी शामिल था।

फातिमा ‘हरिता’ की संस्थापक राज्य अध्यक्ष थीं, जो मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) का महिला विंग है। 2012 में शुरू हुए ‘हरिता’ ने कॉलेज परिसरों में IUML की महिला समर्थकों के लिए एक मंच तैयार किया। उनकी अगुवाई में, ‘हरिता’ ने अलग-अलग परिसरों में MSF का प्रभाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

फातिमा ने मामले में कुछ भी बोलने से किया इनकार

फातिमा के राजनीतिक सफर में तब एक नया मोड़ आया जब ‘हरिता’ की नेताओं ने MSF के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। जब ​​पार्टी नेतृत्व ने कथित तौर पर इस मामले को दबाने की कोशिश की, तो उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई। नतीजतन, उन्हें MSF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया और आखिरकार ‘हरिता’ को भंग कर दिया गया।

‘निलाविलक्कु’ विवाद के गरमाए रहने के बीच फातिमा ने कहा कि मैं अब उस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में महिलाओं के एक समूह द्वारा खोले गए रेस्तरां के उद्घाटन के मौके पर 25 मई को यह दीपक जलाया था।

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