भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की अटकलों के बीच बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का मुख्यमंत्री निवास पहुंचना राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे गया है। ऐसे समय में जब कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुटी है, सप्रे की मौजूदगी भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद सीएम हाउस में देखे जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्मला सप्रे का भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा करना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई महीनों से वे कई सरकारी और भाजपा कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं। कांग्रेस ने इसे दल-बदल कानून का उल्लंघन बताते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की थी। हालांकि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले उनका फिर भाजपा खेमे के करीब दिखाई देना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है।
दूसरी ओर, भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद राज्यसभा चुनाव का गणित और अधिक दिलचस्प हो गया है। इसी चुनौती को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को साधने के लिए ‘लंच पॉलिटिक्स’ का सहारा लिया। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विधायकों की बैठक और सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जहां प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनावी रणनीति पर मंथन किया।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ेबंदी को लेकर भी गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक सेंधमारी की कोशिशें तेज हो सकती हैं। ऐसे में निर्मला सप्रे का सीएम हाउस पहुंचना कांग्रेस की रणनीति और एकजुटता दोनों पर सवाल खड़े करता है।



















