बच्चे मन के सच्चे होते हैं. उनकी मासूमियत हमारी सारी थकान दूर कर देती है. कभी-कभी तो बच्चों की कही एक छोटी सी बात भी बड़े-बड़ों को वो सबक सिखा जाती है, जो मोटी-मोटी किताबें भी नहीं सिखा पातीं. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला किस्सा वायरल हो रहा है, जो हर उस माता-पिता की कहानी बयां करता है जो सुबह अपने बच्चों का पेट पालने और उनके सुनहरे भविष्य के लिए घर से निकलते हैं, लेकिन शाम को जब लौटते हैं तो बच्चों की आखों में सिर्फ और सिर्फ इंतजार का सूनापन, प्यार की आश होती है.

एक मां ने अपने 7 साल के बेटे के साथ हुई बेहद निजी और भावुक बातचीत को सोशल मीडिया पर शेयर किया. किसे पता था कि एक 7 साल का बच्चा अपनी मां से ऐसे प्रश्न पूछ सकता है.यह कहानी देखते ही देखते हजारों माता-पिता के दिल को छू गई और हजारों कामकाजी माता-पिता (Working Parents) के छिपे हुए दर्द और गिल्ट को बाहर ले आएगा.

एक मासूम वादा, जो ऑफिस की फाइलों में दब गया

कहानी की शुरुआत बहुत ही प्यारी और रोजमर्रा की तरह आम थी. सुबह जब 7 साल का मासूम बच्चा स्कूल के लिए तैयार हो रहा था, तो उसने अपनी मां से बड़ी मासूमियत से पूछा, ‘मम्मा, क्या आज शाम को ऑफिस से आने के बाद हम दोनों मिलकर एक सुंदर सा ग्रीटिंग कार्ड बनाएंगे? मेरे दोस्त का बर्थडे है.’ मां ने मुस्कुराते हुए बेटे को हां कह दिया. बच्चा खुश होकर स्कूल चला गया और मां अपने दफ्तर.

लेकिन, किसे पता था कि दफ्तर की जिम्मेदारियां और घड़ियां इतनी बेरहम हो जाएंगी. दिन भर काम का दबाव, फाइलों का बोझ और फिर शाम को घर लौटने का वो ट्रैफिक… समय हाथ से रेत की तरह फिसल गया. जब तक मां ऑफिस से निकली तब तक बहुत देर हो चुकी थी. महिला ने अपने बेटे को अपने पैरेंट्स के घर से पिक किया और अपने घर पहुंची.

घर पहुंचते ही मां की नजर अपने बेटे पर पड़ी. सुबह जो चेहरा ग्रीटिंग कार्ड की खुशी से चमक रहा था, वो अब उदासी के अंधेरे में डूबा हुआ था. बच्चा गुमशुम था, उसके चेहरे पर उदासी थी. जैसे ही महिला की नजर बच्चे पर पड़ी तो उसने बच्चे से पूछा- क्या हुआ बेटा! तुम उदास लग रहे. तभी अचानक बच्चे ने मां की आंखों में देखकर पूछा, ‘मम्मा, आपके लिए ज्यादा जरूरी कौन है, मैं या आपका ऑफिस?’

यह सवाल सुनते ही मानो उस मां के पैरों तले जमीन खिसक गई. मां ने कहा, “बेटा, ये कैसा सवाल पुछ रहे! तुम ही जरूरी हो. इस दुनिया में मेरे लिए तुमसे बढ़कर कुछ नहीं है.’ लेकिन बच्चे का यह सवाल उस मां के सीने में तीर की तरह चुभ गया था. वह सोचने पर मजबूर हो गई कि जो बात इतनी साफ है, वह उसके 7 साल के बच्चे को समझानी क्यों पड़ रही है?

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