प्रधानमंत्री पद पर मोदी हैं, तब तक सब कुछ ‘मुमकिन’ है, इसका यकीन अब प्रत्यक्ष प्रभु श्रीराम को भी हो गया होगा। अयोध्या के राम मंदिर को हरे आतंकवादियों से खतरा होने की खबरें उड़ाई जाती हैं, लेकिन असल में यह खतरा भारतीय जनता पार्टी के ही लोगों से है। राम मंदिर की दानपेटी से करीब पांच करोड़ रुपए का गबन हुआ है, यह बात चौंकाने वाली है। दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अपनी-अपनी हैसियत के अनुसार दानपेटी में धनराशि डालते हैं। उसमें से कम से कम पांच करोड़ रुपए का गबन हुआ है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अयोध्या में चोरी का यह मामला सामने लाया। ‘‘राम मंदिर ट्रस्ट के ही एक प्रमुख व्यक्ति ने इस चोरी की जानकारी दी। श्रीराम उनका भला करें,’’ ऐसा श्री यादव ने कहा। भाजपा के लोगों ने श्रीराम को भी नहीं छोड़ा और उन्हें भी लूट लिया। जिन श्रीराम के नाम पर राजनीति की, वोट मांगे, उन्हीं श्रीराम के खजाने पर ‘हाथ’ मारने का यह कृत्य घृणास्पद है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भव्य समारोह किया गया। खुद प्रधानमंत्री मोदी मंदिर के गर्भगृह में दस-बारह दिन रहे। उन्होंने व्रत-उपवास किए। उसी समय पूरे भारत में उनके अंधभक्तों ने विज्ञापनबाजी की। खास गाने रचे, उसमें क्या कहा गया?
जो राम को लाए हैं,
हम उनको लाएंगे
जो राम को लाए हैं,
हम उनको लाएंगे
दुनिया में फिर से हम
भगवा लहराएंगे…
प्रधानमंत्री मोदी बाल श्रीराम का हाथ पकड़कर अयोध्या में निकले हैं, ऐसे पोस्टर उस समय लगे थे तो धक्का लगा था। श्रीराम अयोध्या में आए तो सिर्फ मोदी की वजह से, यह बताने का यह तरीका था। फिर उन्हीं श्रीराम की दानपेटी से पांच-सात करोड़ अब गायब हो गए, वो कैसे? ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ यह मोदी की दहाड़ अयोध्या में ही खोखली साबित हुई।
क्या किया?
मोदी को प्रधानमंत्री बने १२ साल हो गए। इन १२ सालों में मोदी ने देश के लिए कौन सा ठोस काम किया? भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने का वादा करके वे आए और इन १२ सालों में इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ। भारत में रोज औसतन सौ करोड़ का ‘बैंक फ्रॉड’ होता है और ये सभी लोग मोदी के गुजरात से संबंधित हैं। राजेश मेहता नामक मोदी के मित्र ने तो १५ लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड किया और सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगी। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का यह हाल है। प्रभु श्रीराम की शपथ पर हर एक के खाते में १५ लाख डालने का वचन मोदी ने दिया था, पर गुजरात का अकेला राजेश भाई १५-१५ लाख करोड़ उड़ाकर चला गया। १२ साल में मोदी ने क्या किया, तो ऐसे कई राजेशभाई उन्होंने खड़े किए। १२ साल में श्रीराम का मंदिर तो खड़ा हो गया, पर इस रामराज्य में स्वतंत्रता, भाईचारा, लोकतंत्र नष्ट कर दिया गया। उस लिहाज से १२ साल में भारतीय रामराज्य का पूरा नरक बन गया। राम मंदिर की दानपेटी की लूट प्रतीकात्मक है। जनता की लूट, सार्वजनिक संपत्ति की लूट रोज ही जारी है। अयोध्या में जब श्रीराम वनवास गए थे तब भरत ने सिंहासन पर श्रीराम की चरण पादुकाएं रखकर राज किया और श्रीराम के वनवास से लौटते ही अयोध्या श्रीराम के हवाले कर दिया। यहां क्या चल रहा है? मानो सिंहासन पर एक गौतमभाई की ही पादुकाएं हैं और मोदी-शाह रोज पाद्य-पूजा कर रहे हैं। जिस देश में मोदी जाते हैं उस देश में अडानी को बड़ा ठेका मिलता है और वहां अडानी का नया उद्योग शुरू हो जाता है, यह कोई रामराज्य का लक्षण नहीं है। सारे नियम, कानून, वचन तोड़कर सिर्फ एक ही व्यक्ति की भरपूर तरक्की १२ साल में हुई, क्या अयोध्या में श्रीराम इसी के लिए लाए गए थे?
चुनावों का ढोंग!
मोदी के राज में क्या चल रहा है? देश का हर चुनाव सिर्फ एक ढोंग बनकर रह गया है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो चुनावों की ही चोरी हो गई। यह श्रीराम की दानपेटी पर ही डाका डालने जैसा है। हम श्रीराम को अयोध्या में लेकर आए, इसलिए उनकी दानपेटी पर डाका डालने का अधिकार हमें है। कोई सवाल पूछे तो उसे देशद्रोही करार दे देंगे, ऐसी अकड़ में भाजपा के लोग हैं। सत्ता इंसान को विनम्र बनाती है। भारत में मोदी और उनके लोगों को पाशविक सत्ता ने शैतान बना दिया। लोकतंत्र की एक भी मर्यादा रेखा वे मानने को तैयार नहीं हैं। रामायण की लक्ष्मण रेखा पर तो उन्होंने कब का तंबाकू थूक दिया। भारतीय चुनावों का एक और घिनौना खेल मध्य प्रदेश में हुआ। वहां कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का उम्मीदवारी पर्चा ही रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया। तेलंगाना के एक आपराधिक केस की जानकारी उन्होंने छुपाई, यह कारण दिया गया। दरअसल, तेलंगाना के एक मामले में पुलिस ने नटराजन को सिर्फ ‘शो कॉज’ यानी कारण बताओ नोटिस दिया था। वह अपराध नहीं होता। राज्यसभा की उम्मीदवारी खारिज करने लायक वह गंभीर अपराध नहीं है। उसी समय झारखंड में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को उनके उम्मीदवारी पर्चे की गलतियां सुधारने के लिए २४ घंटे का समय बढ़ाकर दिया गया। कांग्रेस की सामान्य उम्मीदवार के लिए एक न्याय और भाजपा समर्थित उद्योगपति उम्मीदवार के लिए विशेष न्याय। चुनाव आयोग की यह हरामखोरी है। खुद मोदी ने कई चुनावों में अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी छुपाई। फिर भी उनके पर्चे वैध ठहराए गए, लेकिन मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी ही चोरी हो गई। मीनाक्षी नटराजन आचरण और जीवन में गांधीवादी हैं। उनका सारा जीवन देशसेवा में गया। वे ईमानदार हैं। कांग्रेस पार्टी ने २०२४ के लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें उम्मीदवारी दी। खर्च के लिए पांच करोड़ रुपए दिए। चुनाव में वे हार गर्इं, पर चुनाव खत्म होते ही चार करोड़ रुपए उन्होंने पार्टी के खजाने में जमा कर दिए। एक पैसे का भी गबन नहीं किया। ऐसे ईमानदार उम्मीदवार का पर्चा जबरदस्ती खारिज करवाना ही मोदी की १२ साल की तपस्या है। चोर, डकैतों को पूरी छूट, लेकिन गांधीवादी, ईमानदार मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा में आने से रोका गया, यह है मोदी का रामराज्य। उनका ‘राम’ अलग है। सत्यवचनी श्रीराम की उंगली उन्होंने पकड़ी होती तो वह असली ‘राम’ मोदी की उंगली छोड़कर चल दिए होते। १२ साल में भारत की धरती पर पाप का बोझ बढ़ गया है। मंदिर के देवताओं को भी झपकी लग गई है या उन्होंने आंखें मूंद ली हैं। जहां श्रीराम का खजाना ही लूट लिया गया, वहां आंखें खुली रखकर भी भगवान क्या करेंगे? १२ साल में लोगों ने मोदी को ही देवता बना दिया। इसलिए मंदिर के असली देवताओं के पास काम ही नहीं बचा।
कैसा विक्रम?
मोदी १२ साल से प्रधानमंत्री पद पर विराजमान हैं। यह पूरा समय झूठ बोलने और झूठा व्यवहार करने में गया। नेहरू का विक्रम (कीर्तिमान) तोड़ा, उनका यह दावा भी झूठ ही है। जवाहरलाल नेहरू १५ अगस्त १९४७ को प्रधानमंत्री बने और २७ मई १९६४ तक उस पद पर रहे।
यानी १६ साल ९ महीने १२ दिन। नरेंद्र मोदी २६ मई २०१४ को प्रधानमंत्री बने और १० जून २०२६ को भी वे इस पद पर हैं।
यानी १२ साल १५ दिन।
पंडित नेहरू का कौन सा विक्रम उन्होंने तोड़ा? सत्यवचनी श्रीराम के देश में १२ साल असत्य की भांग के पौधे ही उगाए।
क्या यह विक्रम है? क्या यह योगदान है? प्रभु श्रीराम एक दिन अयोध्या का त्याग कर देंगे। इससे तो वनवास बेहतर है, ऐसा कहेंगे।
चलो, प्रभु श्रीराम को अयोध्या छोड़ने से रोकें।

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