अहमदाबाद: राज्यसभा चुनावों में झारखंड से परिमल नाथवाणी की जीत की राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा हो रही है। दरअसल परिमल नाथवानी ने निर्दलीय के तौर पर नामांकन किया था। उन्हें एनडीए का सपोर्ट मिला। इसके बाद उन्होंने झारखंड में इंडिया गठबंधन (झामुओ+कांग्रेस) की सरकार होने के बाद उन्होंने जीत के लिए जरूरी 28 वोट जुटा लिए। ऐसे में सत्तारूढ़ झामुओ और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। परिमल नाथवानी चौथी बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। वह कुछ समय पहले तक आंध्र प्रदेश से सांसद थे, तब उन्हें जगन मोहन की वाईएसआरसीपी ने नॉमिनेट किया था। इससे पहले वह दो बार झारखंड से भी सांसद रह चुके हैं। परिमल नाथवानी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेहद करीबी के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि वह रिलांयस इंडस्ट्रीज में ऊंचे पद पर हैं, लेकिन परिमल नाथवानी की निजी जिंदगी का सफर काफी प्रेरक है।
कोल्डड्रिंक से साबुन तक बेचे
क्रिकेट के बड़े शौकीन परिमल नाथवानी वर्तमान में व्यवसायिक गतिविधियों के साथ एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए सुर्खियों में रहते हैं। 70 साल के परिमल नाथवानी का 1 फरवरी, 1956 को हुआ था। उन्हें कॉलेज के दिनों से ही बड़ा आदमी बनने का जुनून था। जामनगर में जन्मे परिमल नाथवानी का कई बार असफलता से सामना हुआ लेकिन वह अपने लक्ष्य पर डटे रहे। उन्होंने मुंबई में कोल्डड्रिंक के बाद साबुन की डीलरशिप से लेकर इसकी फैक्ट्री तक चलाई लेकिन बात नहीं, तो इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने गुजरात के वडोदरा से शुरुआत करके गुजरात में 40 के करीब पीसीओ भी चलाए। एक पीसीओ बड़ौदा स्टॉक एक्सचेंज में लगाने को मिला। यहीं से परिमल नाथवानी को शेयर ब्रोकर बनने का ख्याल आया, लेकिन हर्षद मेहता कांड में उनकी बड़ी रकम डूब गई। नाथवानी को जियो (Jio) नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। सौराष्ट्र से आने वाले परिमल नाथवानी के लिए वडोदरा काफी अहम रहा है।
धीरूभाई से मिलने के बाद बदली जिंदगी
शेयर बाजार में झटके और बड़े आर्थिक नुकसान के तनाव में आए परिमल नाथवानी के लिए सुसाइड करने जैसी स्थिति बन गई थी। वह अपने जाम खंभालिया लौटे। पिता से रुपये मांगे। इन मुश्किल हालात में भी नाथवानी ने हार नहीं मानी। नाथवानी बताते हैं उस वक्त पर रामजीभाई मवानी और चिमन भाई मेहता ने उनकी आर्थिक तौर पर मदद की। नाथवानी की जिंदगी में बड़ा टि्वस्ट तब आया है जब 1997 के आसपास उनकी मुलाकात रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक धीरूभाई अंबानी से हुई। उस वक्त पर धीरूभाई अंबानी ने परिमल नाथवानी से यह पता लगाने को कहा कि जामनगर भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान उनके खिलाफ क्यों हैं? नाथवानी ग्राउंड रिपोर्ट उन्हें दी। यहीं से वह धीरूभाई अंबानी के नजदीक आ गए। बाद में परिमल नाथवानी की देखरेख में ली जमीन का अधिग्रहण हुआ। गुजरात की इस जमीन पर जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी स्थित है। परिमल नाथवानी ने इसके बाद मुड़ कर नहीं देखा। आज रिलायंस के हर बड़े फैसले में परिमल नाथवानी की राय शामिल होती है। मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के लिए वह काफी अहमियत रखते हैं।
अहमदाबाद में बनवाया सबसे बड़ा स्टेडियम
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के पद पर कार्यरत परिमल नाथवानी पिछले तीन दशक से व्यापार, राजनीति और खेल प्रशासन में सक्रिय हैं। वह पहली बार 2008 में झारखंड से राज्यसभा के चुने गए थे। तब भी वे निर्दलीय कैंडिडेट के तौर जीते थे। परिमल नाथवानी वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 30 सितंबर 2011 से 15 सितंबर 2012 तक इस पद पर रहे। वह रिलायंस में कई जिम्मेदारियों को संभालने के साथ गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे जनवरी 2010 से सितंबर 2019 तक जीसीए के उपाध्यक्ष पद पर रहे। इसी कार्यकाल के दौरान उन्होंने अहमदाबाद में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम (नरेंद्र मोदी स्टेडियम) के पुनर्निर्माण कार्य की देखरेख की थी। इसके अलावा नाथवानी गुजरात के प्रसिद्ध द्वारका मंदिर की देवस्थान समिति के उपाध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। वह नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य हैं। इसके अलावा नाथवानी गीत (GEET) फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक है। यह पर्यावरण और गिर के शेरों के संरक्षण को बढ़ावा देने वाला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है।



















