What's Hot

मध्य पूर्व में महीनों चले कड़े संघर्ष और युद्ध के बाद कूटनीतिक गलियारे से खबर सामने आई है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा. भारतीय दल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा संयुक्त रूप से करेंगे. यह फैसला ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए आधिकारिक निमंत्रण के बाद लिया गया है.

पीएम नरेंद्र मोदी के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय दौरों के कारण इन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में स्वयं शामिल नहीं हो पा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले से तय और बेहद व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों (जिसमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्राएं शामिल हैं) के कारण वे तेहरान की यात्रा नहीं कर सकेंगे.

भारत सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए अपने सबसे अनुभवी चेहरों को चुना है. लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन सैन्य मामलों के साथ-साथ मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) और आतंकवाद विरोधी मामलों के बड़े रणनीतिक विशेषज्ञ माने जाते हैं. वहीं पबित्र मार्गेरिटा विदेश राज्य मंत्री के रूप में भारत की कूटनीतिक प्रतिबद्धता का सीधा प्रतिनिधित्व करेंगे.

28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे खामेनेई

ईरान के करीब चार दशकों के इतिहास को आकार देने वाले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत इसी साल 28 फरवरी को पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरुआती चरण के दौरान तेहरान में एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में हो गई थी. युद्ध की विभीषिका के कारण उनके अंतिम संस्कार को स्थगित कर दिया गया था, जो अब युद्धविराम लागू होने के बाद आयोजित किया जा रहा है. 4 जुलाई से शुरू होने वाले इस विदाई समारोह के दौरान उनके पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. इसके बाद तेहरान और पवित्र शहर कोम (Qom) में विशाल सार्वजनिक जुलूस निकाले जाएंगे, और अंततः 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में स्थित प्रसिद्ध इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें दफनाया जाएगा.

सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक है भारत का यह कूटनीतिक कदम

ईरान के प्रति भारत का यह कूटनीतिक झुकाव दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है, जिसके तहत भारत ईरान को अपने ‘विस्तारित पड़ोस’ (Extended Neighbourhood) का अहम हिस्सा मानता है.

खामेनेई की मौत के ठीक बाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे. पूरे 40 दिनों के क्षेत्रीय तनाव के दौरान भी पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में रहे थे.

हाल ही में, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी नई दिल्ली का दौरा कर ब्रिक्स (BRICS) बैठकों के इतर एस जयशंकर और पीएम मोदी से मुलाकात की थी. भारत का यह कदम साल 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के समय अपनाई गई नीति जैसा ही है, जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था. तेहरान में होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत के अलावा इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के भी जुटने की पूरी संभावना है.

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930