उत्तर प्रदेश भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड़ में आ गई है। विधानसभा चुनाव दहलीज पर है और राज्य में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे योगी आदित्यनाथ पार्टी की विजय पताका फहराने को लोगों के बीच हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी आबो-हवा में ध्रुर्वीकरण की गंध रची बसी है, जो भाजपा को खूब रास आती है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत का पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। उन्हें एकमात्र क्षत्रिय के साथ-साथ लगातार दस साल का कार्यकाल एंजाय करने का श्रेय जाता है।

एंटी इनकम्बेंसी और टिकट दावेदारों की फौज बढ़ाएगी बीजेपी की मुसीबत

सवाल है कि क्या वे भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में ला पाएंगे और मुख्यमंत्री के पद पर फिर से आसीन होंगे। उनकी डगर बेहद कठिन प्रतीत हो रही है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं, पहली- भाजपा के विधायकों को लेकर मतदाताओं के बीच जबरदस्त एंटी इनकम्बेंसी बनी हुई है और दूसरी- उम्मीदवार बनने को लेकर दावेदारों के बीच गलाकाट होड़ लगी है।

इसका एक उदाहरण कल तब देवबंद में देखने को मिला जब टिकट के एक प्रमुख दावेदार अनिल ठाकुर ने मौजूदा विधायक और राज्यमंत्री बृजेश सिंह के खिलाफ जबरदस्त ताल ठोक दी और यह कहते हुए दावेदारी पेश की कि टिकट नहीं मिला तो भी वह चुनाव जरूर लड़ेंगे। यही हाल सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली की सभी 16 विधानसभा सीटों पर दिख रहा है

राम मंदिर दान चोरी भी बड़ा मुद्दा बन रहा

इस सबके बीच राम मंदिर दान चोरी का मसला भी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम समाज और भाजपा समर्थक मतदाताओं पर भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान चोरी में हुई जबरदस्त लूट के मामले सामने आने का असर साफ दिख रहा है। बुधवार को सहारनपुर के क्षत्रिय बहुल क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा थी, जिसमें पूर्व की सभाओं में आने वाली भीड़ की तुलना में एक चौथाई लोग ही मुश्किल से जुट सके।

विपक्षी दलों का स्पष्ट आरोप है कि अयोध्या के राम मंदिर में जो करोड़ों रूपयों की जो बंदर-बांट वहां लगे कर्मचारियों और प्रबंधकों ने सालों-साल की और किसी ने उस ओर ध्यान नहीं दिया। उससे लोगों में भारी निराशा है और विपक्षी दल तो सीधे-सीधे भाजपा की नीयत पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के भ्रमण हैं और अपनी चित-शैली में कामकाज भी कर रहे हैं लेकिन बुधवार को बदले हुए हालात ने उनके चेहरे पर भी पहले जैसे तेज और आभा नहीं थी। कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के कंधे भी गिरे हुए थे।

दो दिन पूर्व ही अयोध्या के दर्शन कर लौटे सभा में मौजूद युवा पत्रकार का कहना था कि अयोध्या में भी दर्शनार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है और वैसा ही असर बुधवार को मुख्यमंत्री की सभा में दिखाई दिया।

योगी सक्रिय लेकिन अखिलेश सुस्त

ये हालात जहां भाजपा का मनोबल गिराने वाले हैं, वहीं विपक्षी दलों का खासकर सपा और कांग्रेस का जिनका पिछले लोकसभा चुनाव में उल्लेखनीय और शानदार प्रदर्शन रहा के हौसले बुलंदियों पर हैं। यह अलग बात है कि अखिलेश यादव की सक्रियता योगी आदित्यनाथ जैसी बिल्कुल नहीं है।

योगी आदित्यनाथ तो चुनाव प्रचार का अपना काम बिना चुनाव घोषित हुए ही करीब-करीब कर चुके हैं जबकि अखिलेश यादव लगता है कि अभी नींद से जागे भी नहीं हैं। ऐसी सूरत में संदेह होता है कि विपक्ष भाजपा के खिलाफ बने माहौल को विधानसभा चुनाव के दौरान कैसे भुना पाएगा।

यह भी हो सकता है कि चुनाव आते आते भाजपा अयोध्या कांड से किसी तरह से उभर जाए तो विपक्ष के लिए मुश्किलें और भी पेचीदा हो जाएंगी। बहरहाल, भाजपा और नेता योगी आदित्यनाथ की चाल बेहद चुस्त है विपक्ष और उसके नेता अखिलेश यादव की सुस्ती और निष्क्रियता हर स्तर पर बनी हुई है। विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा का मिशन-2027 साधना मुश्किल जरूर है पर असंभव नहीं।-सुरेंद्र सिंघल

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