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मदुरै: तमिलनाडु में ऐतिहासिक शहर तंजावुर के तंजावुर के अभीष्ट वरदराजपेरुमल मंदिर का एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, इस मंदिर में एक अमेरिकी महिला को प्रवेश देने से मना कर दिया गया था, जबकि उसका दावा था कि वह हिंदू धर्म को मानती है। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने हाल ही में तमिलनाडु सरकार के हिंदू रिलीजियस एंड चैरिटेबल एंडाउमेंट्स डिपार्टमेंट (HR&CE) को निर्देश दिया कि वे उसे किसी भी मंदिर में एक हिंदू महिला भक्त को मिलने वाले किसी भी अधिकार से वंचित न करें, बशर्ते कि रीति-रिवाजों, आगमों और नियमों का पालन किया जाए।

अमेरिकी महिला ने मंदिर में जाने से रोकने को दी थी चुनौती

  • न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने यह निर्देश महिला लॉरा फ्रांसिस अयंगर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
  • महिला ने HR&CE विभाग के 10 अगस्त, 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे ‘अमेरिकी ईसाई महिला’ बताया गया था और अन्य भक्तों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाने के लिए उसे मंदिर के बाहरी परिसर तक ही सीमित रहने को कहा गया था।

हिंदू धर्म एक ऐसा विश्वास है जो ऐतिहासिक रूप से सबको साथ लेकर चलने वाला और उदार रहा है।

जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती, मद्रास हाईकोर्ट

अमेरिकी महिला ईसाई है, यह बात तथ्यात्मक रूप से गलत: जज

  • जस्टिस चक्रवर्ती ने कहा कि अधिकारियों का यह निष्कर्ष कि याचिकाकर्ता एक ‘अमेरिकी ईसाई महिला’ है, तथ्यात्मक रूप से गलत और टिकने लायक नहीं है।
  • जज ने कहा, ‘हिंदू धर्म एक ऐसा विश्वास है जो ऐतिहासिक रूप से सबको साथ लेकर चलने वाला और उदार रहा है। कुछ अन्य धर्मों के विपरीत, इसमें धर्म अपनाने के लिए किसी अनिवार्य औपचारिक समारोह या किसी प्रमाण पत्र जारी करने की शर्त नहीं है।’

अन्य धर्मों के विपरीत हिंदू धर्म में अपनाने के लिए किसी अनिवार्य औपचारिक समारोह या किसी प्रमाण पत्र जारी करने की शर्त नहीं है।

जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती, मद्रास हाईकोर्ट

अमेरिकी महिला को हिंदू माना जाए और मंदिर में प्रवेश दें

  • जज ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ता का नाम ‘लॉरा फ्रांसिस’ है या उसके पास अमेरिकी नागरिकता है, उसे हिंदू के तौर पर मान्यता देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि उसका आचरण और विश्वास साफ़ तौर पर दिखाता है कि वह हिंदू धर्म को मानती है।
  • जज ने कहा-इसीलिए मैंने उस रोक को हटा दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को एक हिंदू श्रद्धालु माना जाए और मंदिर में पूजा-अर्चना के संबंध में एक हिंदू महिला श्रद्धालु पर लागू होने वाले सभी अधिकार और दायित्व उस पर भी समान रूप से लागू हों।

महिला के पास अमेरिकी नागरिकता है, मगा उसे हिंदू के तौर पर मान्यता देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि उसका आचरण और विश्वास साफ़ तौर पर दिखाता है कि वह हिंदू धर्म को मानती है।

जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती, मद्रास हाईकोर्ट

लॉरा फ्रांसिस ने बता दी अपनी हकीकत

  • लॉरा फ्रांसिस ने अपनी याचिका में कहा कि भले ही वह अमेरिकी नागरिक हैं, लेकिन वह कई सालों से हिंदू धर्म का पालन कर रही हैं और उन्होंने अपने वीज़ा दस्तावेजों में भी खुद को हिंदू बताया है। बाद में, 2023 में उन्होंने उसी मंदिर में एक हिंदू व्यक्ति से शादी की।
  • हालांकि, जब वह 2024 में मंदिर गईं, तो कुछ श्रद्धालुओं ने उनके प्रवेश पर आपत्ति जताई, क्योंकि उन्हें लगा कि वह हिंदू धर्म की नहीं हैं। जब उनके पति ने HR&CE अधिकारियों को पत्र लिखकर उन्हें मंदिर में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने की अनुमति मांगी, तो अधिकारियों ने आदेश जारी किया, जिसके बाद उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।

भ्गवान विष्णु को समर्पित है अभीष्ट वरदराज पेरुमल मंदिर

अभीष्ट वरदराज पेरुमल मंदिर मुख्य रूप से तमिलनाडु के करप्पंकाडु गांव (मदुक्कुर, तंजावुर जिले के पास) और तिरुथुराईपूंडी (तिरुवरूर जिले) में स्थित है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत सम्मानित मंदिर है, जो अपनी समृद्ध पौराणिक कथाओं, शांत ग्रामीण परिवेश और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली शक्तिशाली प्रार्थनाओं के लिए प्रसिद्ध है।

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