स्टीम इंजन से लेकर वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों तक भारतीय रेलवे ने लंबा सफर तय किया है. रेलवे ने यात्रियों की यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा तेज, आरामदायक और सुरक्षित बना दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी मॉडर्न रेलवे के बीच एक ऐसी ट्रेन भी है, जो पिछले करीब 145 सालों से लगभग उसी उद्देश्य के लिए चल रही है, जिसके लिए अंग्रेजों ने इसे शुरू किया था? इस ट्रेन में न कोई यात्री सफर करता है और न ही आम सामान ढोया जाता है. इसका काम सिर्फ एक है, नमक को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाना. दरअसल, राजस्थान के सांभर में चलने वाली यह अनोखी साल्ट ट्रेन (India’s Unique Salt Train) आज भी अपने इतिहास को जिंदा रखे हुए है.

राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित सांभर झील(Sambhar Salt Lake) भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है. यहां सदियों से बड़े पैमाने पर नमक का उत्पादन होता आ रहा है. झील में बनने वाले नमक को उत्पादन स्थल से स्टोरेज बैंक तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने एक खास रेलवे लाइन बिछाई थी. यही लाइन आज भी इस्तेमाल हो रही है और इसी पर यह ऐतिहासिक नमक रेल दौड़ती है.

अंग्रेजों ने क्यों बनाई थी यह रेलवे लाइन?
इतिहासकारों के अनुसार, साल 1835 में ब्रिटिश सरकार ने सांभर झील में नमक उत्पादन का काम अपने नियंत्रण में ले लिया था. इसके बाद उन्हें एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा. झील के आसपास की काली और मुलायम मिट्टी और पानी से घिरे इलाके की वजह से सड़क बनाना लगभग नामुमकिन ही था. ऐसे में नमक को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना बेहद मुश्किल था. इस समस्या का समाधान निकालते हुए 1876 में अंग्रेजों ने यहां मीटर गेज (Meter-gauge) और नैरो गेज (Narrow Gauge) रेलवे ट्रैक बिछाए. उसी समय से यह नमक रेल लगातार चल रही है.

पहले स्टीम इंजन, अब पुराने डीजल इंजन से चलती है ट्रेन
शुरुआत में इस ट्रेन को स्टीम इंजन खींचते थे. समय के साथ स्टीम इंजन की जगह डीजल इंजन ने ले ली. दिलचस्प बात यह है कि आज भी इस ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले दोनों डीजल इंजन लगभग 50-60 साल पुराने हैं. वहीं नमक ढोने वाले डिब्बे लकड़ी और लोहे से बने हुए हैं, जो इस ट्रेन को और भी खास बनाते हैं. देशभर में चलने वाली ज्यादातर ट्रेनें यात्रियों या माल ढुलाई के लिए होती हैं, लेकिन सांभर की यह ट्रेन बिल्कुल अलग है. यह ट्रेन केवल नमक की क्यारियों से तैयार नमक को स्टोरेज बैंक तक पहुंचाने का काम करती है. आम लोगों को इसमें सफर करने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं होती.

फिल्म ‘पीके’ में भी दिख चुकी है यह ट्रेन
सांभर झील सिर्फ नमक उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि फिल्म शूटिंग के लिए भी काफी ज्यादा मशहूर है. आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘पीके’ में इस ऐतिहासिक नमक रेल और इसके ट्रैक की झलक दिखाई गई थी. इसके अलावा फिल्म ‘गुलाल’ के कुछ दृश्य भी यहीं फिल्माए गए थे. मशहूर गायक हंसराज हंस (Hans Raj Hans) के एक म्यूजिक एल्बम में भी यह रेलवे ट्रेन नजर आ चुकी है.

आज भी संभालकर रखा गया है ब्रिटिश दौर का इतिहास
फिलहाल सांभर झील में नमक उत्पादन और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी सांभर साल्ट लिमिटेड(Sambhar Salts Limited) के पास है.(सांभर साल्ट्स लिमिटेड (SSL) राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित एक सरकारी कंपनी है। यह भारत सरकार की हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (HSL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है. फिलहाल सांभर झील में नमक का उत्पादन, उसका रखरखाव और बिक्री का काम इसी कंपनी की देखरेख में किया जाता है ). कंपनी नियमित रूप से इन पुराने रेलवे ट्रैक और ट्रेनों का रखरखाव करती है ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके. आज सांभर क्षेत्र में करीब 45 किलोमीटर मीटर गेज और 24 किलोमीटर नैरो गेज ट्रैक अब भी इस्तेमाल में हैं, जो अपने आप में बेहद दुर्लभ हैं. यह रेलवे लाइन कई लोगों से भरे जगहों से होकर गुजरती है. सुरक्षा के लिए रास्ते में सात रेलवे फाटक बनाए गए हैं. ट्रेन के आने से पहले यहां तैनात कर्मचारी फाटक बंद कर देते हैं, जिससे कोई दुर्घटना न हो.

टूरिस्ट के लिए भी आकर्षण का केंद्र
सांभर झील देखने आने वाले टूरिस्ट के लिए यह नमक रेल किसी अजूबे से कम नहीं है. देश-विदेश से हजारों लोग इस ऐतिहासिक ट्रेन और ब्रिटिशकालीन रेलवे ट्रैक को देखने पहुंचते हैं. हालांकि, इस ट्रेन में सफर करने की अनुमति नहीं होती, लेकिन इसे चलते हुए देखना अपने आप में एक अलग अनुभव माना जाता है. जब पूरा देश वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की ओर बढ़ चुका है, तब राजस्थान की सांभर झील में यह 145 साल पुरानी नमक रेल आज भी अपने मूल उद्देश्य के साथ चल रही है. यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे की सबसे अनोखी और ऐतिहासिक ट्रेनों में गिना जाता है. यह सिर्फ नमक ही नहीं ढोती, बल्कि अपने साथ भारत के रेलवे इतिहास की एक अनमोल विरासत भी आगे बढ़ा रही है.

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