Trending: मिष्टी यादव नाम की महिला ने गुरुवार को अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, ‘आज मैं साड़ी खरीदने बाजार गई थी. जिस दुकान पर मैं साड़ियां देख रही थी, वहां काफी भीड़ थी. तभी एक महिला उस दुकान पर आई और दुकानदार से बोली- भैया! जरा अपनी दुकान की सबसे महंगी साड़ी दिखाइए. बिना समय बर्बाद किए, दुकानदार ने उसे 29000 रुपये की एक साड़ी दिखाई. महिला ने उसे देखा, ज़्यादा मोल-भाव नहीं किया, और किसी दूसरी दुकान पर कीमत पता किए बिना ही उसे खरीद लिया.’
‘आउट ऑफ क्यूरोसिटी चेक किए दाम’
मिष्टी ने आगे लिखा, ‘मैं यह सब देख रही थी. उत्सुकतावश, मैंने सोचा कि उस साड़ी की असल कीमत क्या होगी. इसलिए, मैंने उसकी कीमत ऑनलाइन चेक करने का फैसला किया. वही साड़ी जिसे महिला ने दुकान से 29 हजार में खरीदा था, ऑनलाइन सिर्फ 9700 रुपये में मिल रही थी. इसका मतलब यह है कि अगर ऑनलाइन कीमत सही थी और वह बिल्कुल वही साड़ी थी, तो महिला ने लगभग 19 हजार 300 ज्यादा खर्च कर दिए.’
‘लोग इतनी जल्दबाजी क्यों करते हैं?’
पोस्ट की आखिर में मिस्टी ने कहा, ‘मैं सोचने लगी कि लोग अपनी मेहनत की कमाई खर्च करते समय इतनी जल्दबाजी क्यों करते हैं. साड़ी खरीदने में कोई बुराई नहीं है. हर किसी को अपनी पसंद की चीज खरीदने और खुद पर पैसे खर्च करने का हक है. लेकिन क्या कुछ भी खरीदने से पहले दो-तीन अलग-अलग जगहों पर कीमतें चेक कर लेना जरूरी नहीं है? हो सकता है कि दुकान की कीमत में किराया, स्टाफ की सैलरी, सर्विस और अन्य खर्च शामिल हों. फिर भी, ग्राहकों को कीमतें जरूर देखनी चाहिए ताकि वे अपनी खरीदारी से संतुष्ट रह सकें.’



















