जम्मू-कश्मीर की सियासत एक बार फिर देश के केंद्र में आ गई है। आगामी विरोध प्रदर्शनों को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला द्वारा ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और स्थानीय नेताओं को लिखी गई चिट्ठी ने एक नया सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है। इस कदम पर भारतीय जनता पार्टी यानी BJP ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने विपक्षी खेमे की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यह आंदोलन वाकई पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए है या फिर इसके पीछे अलगाव वाली पुरानी ‘अलग राह’ (सेपरेटहुड) की मंशा छिपी है?
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर पहले ही सब कुछ स्पष्ट किया जा चुका है। लेकिन क्या ‘स्टेटहुड’ के नाम पर ‘अलगाववाद’ को बढ़ावा दिया जा रहा है? क्योंकि कश्मीर मुद्दे पर जो लोग पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं, जो चाहते हैं कि कश्मीर के हालात कभी न सुधरें। उन्हीं लोगों के साथ आप विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इंडी (INDIA) गठबंधन के लोग भी उनका समर्थन कर रहे हैं। क्या भाजपा का विरोध करते-करते ये लोग अब देश का भी विरोध करने लगे हैं?’
क्या है पूरा मामला?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ नेशनल क्रॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने गुरुवार को 52 प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, धार्मिक और नागरिक समाज के सदस्यों को पत्र लिखा है। इस पत्र में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित किया है।
नेशनल क्रॉन्फ्रेंस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी गई है, जिसमें कहा गया है, ‘जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों और देशभर के नेताओं से संपर्क कर उन्हें संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर आयोजित हमारे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।’
इसी पोस्ट में आगे कहा गया है, ‘यह किसी एक पार्टी, एक क्षेत्र या एक समुदाय का मुद्दा नहीं है। यह भारत की संघीय भावना की रक्षा, संविधान की मर्यादा को बनाए रखने और जम्मू-कश्मीर को लंबे समय से लंबित राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का विषय है, जिसका बार-बार वादा किया गया है। हमें उम्मीद है कि देशभर की हर लोकतांत्रिक आवाज इस साझा उद्देश्य के समर्थन में एकजुट होकर खड़ी होगी।’



















