छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के खूंशी इलाके में बुधवार को मेंढक-मेंढकी की धूमधाम से शादी कराई गई. इस अनोखी शादी में वो हर रस्म निभाई गई, जो एक हिंदू विवाह में होती है. एक आम शादी की तरह, इस शादी में भी पहले दिन, समय और तारीख तय की गई, और फिर पूरे गांव के लोगों को निमंत्रण दिया गया है. सभी लोग सुंदर कपड़े पहनकर एक जगह इकट्ठा हुए और विधि-विधान के साथ विवाह का कार्यक्रम शुरू किया गया.

वीडियो में कैद की हर रस्म

इस अनोखे विवाह समारोह की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई, जिसमें कुछ लोग ढोल बजाते नजर आ रहे हैं, जबकि महिलाएं छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर एक-दूसरे से बातें करती दिख रही हैं. वहीं एक पेड़ के नीचे गांव के कुछ पुरुष मेंढक-मेंढकी की विवाह रस्मों को पूरी कराते नजर आ रहे हैं. सबसे पहले मेंढक-मेंढकी को हल्दी लगाई जाती है. इसके बाद उन्हें स्नान कराया जाता है. फिर अग्नि के बजाय ऊंची घास की एक डंडी के चारों तरह उन्हें घुमाकर 7 फेरे दिलवाए जाते हैं. इसके बाद मेंढक के हाथ से मेंढकी की मांग सिंदूर से भरवाई जाती है. यह सब देख लोग तालिया बजाते हैं और डांस करने लग जाते हैं.

क्यों कराई जाती है मेंढक-मेंढकी की शादी?

इस पूरी कवायद के पीछे एक गहरा लोक मान्यता छिपी है. जब मानसून रूठ जाता है, बारिश नहीं होती और फसलें सूखने लगती हैं, तो गांव वाले बारिश के देवता ‘इंद्र देव’ को मनाने के लिए यह टोटका अपनाते हैं. मान्यता है कि बारिश न होने पर मेंढक-मेंढकी का विवाह कराने से इंद्र देव प्रसन्न हो जाते हैं.

स्थानीय लोगों का मानना है कि जैसे ही यह शादी संपन्न होती है और जोड़े को पास के तालाब या नदी में विदा किया जाता है, वैसे ही आसमान में काले बादल घिर आते हैं और झमाझम बारिश शुरू हो जाती है. विज्ञान के इस दौर में यह मान्यता भले ही अजीब लगे, लेकिन ग्रामीणों के लिए यह उनकी आस्था और प्रकृति से जुड़ने का अपना एक अनूठा तरीका है.

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