Reliance Jio Satellite LEO Network: सैटेलाइट इंटरनेट के लिए रिलायंस जियो को एक जरूरी मंजूरी मिल गई है. दरअसल, जियो लो-अर्थ ऑर्बिट में 1600 सैटेलाइट डिप्लॉय करना चाहती है. देश के स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe ने कंपनी के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. ISRO और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) के साथ मिलकर किए टेक्नीकल रिव्यू में जियो के प्लान को तकनीकी रूप से सही माना गया है. यह मंजूरी मिलने के बाद अब जियो ऑर्बिटल स्लॉट के लिए इंटरनेशनल फाइलिंग कर सकेगी. इसके साथ ही जियो का भारत का पहला सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कॉस्टेलेशन बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा.

यह है जियो की पूरी प्लानिंग

जियो लो-अर्थ ऑर्बिट में 1600 सैटेलाइट डिप्लॉय करना चाहती है. धरती से 160-2000 किलोमीटर ऊपर के ऑर्बिट जोन को लो-अर्थ ऑर्बिट कहा जाता है. 1600 सैटेलाइट की मदद से जियो स्पेस में एक कम्युनिकेशन नेटवर्क बनाएगी, जो देशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी देने के काम आएगा. एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक पहले से ही सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइड करवा रही है, लेकिन इसे अभी भारत में अपनी सर्विस शुरू करने की मंजूरी नहीं मिली है.

20-22 ग्राउंड स्टेशन भी बनाएगी जियो

जियो के प्रस्ताव के मुताबिक, सैटेलाइट नेटवर्क को 4.5-5Tbps की कैपेसिटी ऑफर करने के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा. यह कई दूसरे सैटेलाइट प्रोजेक्ट के मुकाबले काफी ज्यादा है. अपने सैटेलाइट ऑपरेशन और नेटवर्क सर्विस को सपोर्ट करने के लिए जियो देशभर में 20-22 ग्राउंड स्टेशन भी तैयार करेगी. यह नेटवर्क कंज्यूमर और एंटरप्राइज सेगेमेंट की सर्विस देने के लिए यूज किया जाएगा. इसके अलावा जियो ब्रॉडबैंड और सेलुलर बैकहॉल जैसी फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस के साथ-साथ डायरेक्ट-टू-डिवाइस जैसी मोबाइल सैटेलाइट सर्विस देने की भी योजना बना रही है.

कंपीटिटर के मुकाबले सॉलिड है जियो का प्रपोजल

IN-SPACe ने मंजूरी देते हुए कहा है कि जियो का प्रपोजल तकनीकी तौर पर सैटेलाइट सिस्टम वाली दुनिया के बड़ी कंपनियों के स्तर का है. अगर कैपेसिटी की बात करें तो स्टारलिंक को भारत में 600Gbps की स्पीड का अप्रूवल मिला हुआ है. वहीं अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर 3Tbps की स्पीड ऑफर करेगा. इसे भी अभी भारत में मंजूरी मिलना बाकी है. इनके मुकाबले जियो लगभग 5Tbps तक की स्पीड का प्रपोजल लेकर आई है.

मंजूरी मिलने के बाद अब अगला स्टेप क्या?

जियो को अभी भारत सरकार से मंजूरी मिल गई है, लेकिन सैटैलाइट डिप्लॉय करने से पहले इंटरनेशनल लेवल पर कई और मंजूरी लेनी पड़ेगी. इनमें इंटरनेशनल ऑर्बिटल राइट भी शामिल है. इसके लिए जियो ने भारत सरकार से इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) से राइट्स दिलाने में मदद मांगी है.

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