ज्वालामुखी का नाम सुनते ही आंखों के सामने लाल-नारंगी लावा, धुंआ और तबाही की तस्वीर उभरती है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा अनोखा ज्वालामुखी भी है जो इन सबसे अलग है. यहां लावा लाल नहीं बल्कि नीले रंग का दिखाई देता है. रात के अंधेरे में यह नीली आग आसमान की तरह चमकती है और पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है.
इसका नाम है कावाह इजेन (Kawah Ijen) ज्वालामुखी, जो इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित है. यह दुनिया का इकलौता ऐसा ज्वालामुखी है जहां नीली आग का यह नजारा देखने को मिलता है. लेकिन वजह क्या है कि जहां बाकी ज्वालमुखी से लाल लावा निकलता है, वहीं इसके अंदर से निकलने वाली लावा नीले रंग की हो जाती है?
नीली आग का राज
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यहां नीला लावा निकलता है, लेकिन असलियत कुछ और है. कावाह इजेन में बहुत ज्यादा मात्रा में सल्फर (सल्फर गैस) पाया जाता है. जब यह गैस उच्च तापमान पर जलती है तो नीले रंग की लपटें पैदा करती है. रात में यह नजारा और भी खूबसूरत लगता है. सल्फर गैस 600 डिग्री सेल्सियस तक जल सकती है और नीली आग का यह कमाल पैदा करती है. वैज्ञानिक इसे “ब्लू फायर” कहते हैं. दिन में यह जगह सामान्य ज्वालामुखी की तरह दिखती है, लेकिन रात में जादुई नजारा बन जाता है.
खतरनाक लेकिन आकर्षक
कावाह इजेन सिर्फ नीली आग के लिए नहीं बल्कि खतरनाक गैसों और एसिडिक झील के लिए भी जाना जाता है. यहां की झील दुनिया की सबसे ज्यादा एसिडिक झीलों में से एक है. स्थानीय मजदूर यहां से सल्फर निकालने का काम करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है. फिर भी हर साल हजारों पर्यटक रात में ट्रेकिंग करके इस नीली आग को देखने पहुंचते हैं. फोटोग्राफर और नेचर लवर्स के लिए यह स्वर्ग है.
कैसे पहुंचें?
कावाह इजेन पहुंचने के लिए सबसे पहले बाली या जावा के बड़े शहर से ट्रांसपोर्ट लेना पड़ता है. फिर रात की ट्रेकिंग करनी होती है. पूरा ट्रेक करीब 3-4 घंटे का होता है. स्थानीय गाइड के साथ जाना सुरक्षित रहता है. नीली आग का यह नजारा मुख्य रूप से रात 12 बजे के बाद सबसे अच्छा दिखता है. यहां निकलने वाला सल्फर दुनिया के सबसे प्योर सल्फर में से एक है. कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों और नेशनल ज्योग्राफिक में इस जगह को दिखाया जा चुका है.
पर्यटन पर प्रभाव
इस अनोखे ज्वालामुखी ने इंडोनेशिया के पर्यटन को नई ऊंचाई दी है. लोग खासतौर पर ब्लू फायर देखने के लिए आते हैं. हालांकि स्थानीय सरकार पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दे रही है.



















