Ukriane Army New General: रूस के खिलाफ पांच साल से जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने अपनी सेना की कमान ऐसे जनरल को सौंप दी है, जिसकी पहचान सिर्फ पद से नहीं बल्कि मोर्चे पर लिए गए फैसलों से बनी है. राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 43 साल के मेजर जनरल मायखाइलो ड्रापाती को यूक्रेन की सेना का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है. उन्होंने 60 साल के जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की की जगह ली है, जिन्हें हाल के दिनों में बढ़ते विरोध के बीच पद से हटा दिया गया. दिलचस्प बात यह है कि ड्रापाती ऐसे समय सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब यूक्रेन की वायुसेना ने अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान से पहली बार एक रूसी फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया है. अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी इस एयर-टू-एयर सफलता का जिक्र करते हुए इसे यूक्रेन की मजबूत होती वायु रक्षा क्षमता का संकेत बताया. वहीं नए जनरल की नियुक्ति पर एक रूसी मीडिया ने उन्हें कसाई कहा.

कौन हैं मायखाइलो ड्रापाती?

ड्रापाती को यूक्रेन की सेना में ‘नई पीढ़ी का जनरल’ माना जाता है. 1982 में जन्मे ड्रापाती ने 2004 में खारकीव टैंक फोर्सेज इंस्टीट्यूट से पढ़ाई पूरी करने के बाद एक टैंक लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में कदम रखा था. करीब 26 साल की सेवा के दौरान वह लगातार प्रमोशन पाते हुए देश के सबसे भरोसेमंद युद्ध कमांडरों में शामिल हो गए. उनकी पूरी सैन्य पहचान रूस के खिलाफ लड़ाई के दौरान बनी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सहयोगी अधिकारी उन्हें ऐसे कमांडर के तौर पर देखते हैं, जो बदलती युद्ध रणनीति, नई तकनीक और फ्रंटलाइन कमांडरों को अधिक स्वतंत्रता देने के पक्षधर हैं.

जब एक आदेश ने बना दिया हीरो

ड्रापाती पहली बार 2014 में दुनिया की सुर्खियों में आए. मारियुपोल में रूसी समर्थक लड़ाकों ने पुलिस अधिकारियों को घेर लिया था. बचाव अभियान के दौरान ड्रापाती ने बख्तरबंद वाहन के चालक को सिर्फ एक शब्द कहा ‘जाओ!’ इसके बाद वाहन सीधे रूसी बैरिकेड तोड़ता हुआ आगे बढ़ा और घिरे जवानों को सुरक्षित निकालने में कामयाब रहा. उसी साल उन्होंने रूसी घेरे में फंसी अपनी टुकड़ी को भी सुरक्षित बाहर निकालने का नेतृत्व किया. यही घटनाएं उन्हें यूक्रेन के सबसे साहसी सैन्य अधिकारियों में गिनाने लगीं.

नैतिक जिम्मेदारी से इस्तीफा भी दे चुके हैं

ड्रापाती का करियर सिर्फ युद्ध के मैदान की बहादुरी तक सीमित नहीं रहा. जून 2025 में रूस के हमले में एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र पर कम से कम 12 सैनिकों की मौत के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि जिस सेना में कमांडर अपने सैनिकों की जान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेते हैं, वही जीवंत सेना होती है. जिस सेना में कोई जवाबदेह नहीं होता, वह भीतर से कमजोर हो जाती है. उनका यह फैसला यूक्रेन में काफी चर्चा का विषय बना था.

फेडोरोव के समर्थन में भी खुलकर बोले थे

ड्रापाती की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर बर्खास्त रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव के समर्थन में सार्वजनिक पोस्ट लिखी थी. उस पोस्ट में उन्होंने सेना में बदलाव, नई कार्यप्रणाली और नेतृत्व सुधार की जरूरत पर जोर दिया था. अब वही ड्रापाती हटाए गए सेना प्रमुख सिरस्की की जगह सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि ज़ेलेंस्की सेना के शीर्ष नेतृत्व में नई सोच और नई रणनीति को प्राथमिकता देना चाहते हैं.

सबसे बड़ी चुनौती अब शुरू

ड्रापाती ऐसे समय सेना प्रमुख बने हैं जब रूस लगातार ड्रोन, मिसाइल और जमीनी हमले तेज कर रहा है. उनके सामने सिर्फ मोर्चे पर बढ़त हासिल करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि सेना में सुधार, नई तकनीक का इस्तेमाल और राजनीतिक नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना भी उतना ही अहम होगा.

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