International Desk: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान पाकिस्तानी सेना का क्रूर चेहरा खुलकर सामने आ गया है। चुनाव दौरान कई स्थानों से हिंसा, झड़पों और चुनावी गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। मतदान के बीच भींबर, कोटली और रावलाकोट समेत कई इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही, जिससे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय संगठनों और कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान रेंजर्स की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।
भींबर जिले के एक मतदान केंद्र पर विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, इस दौरान एक बैलेट बॉक्स छीनकर उसमें आग लगा दी गई, जिससे उसमें रखे मतपत्र जल गए। चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्मतदान पर निर्णय लिया जाएगा। कोटली जिले के नकयाल क्षेत्र में भी हिंसा हुई। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने दावा किया कि उसके कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की झड़प के दौरान मौत हो गई। पार्टी ने राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाया, जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया है।
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई। संगठन का कहना है कि सरकार के साथ वार्ता विफल होने के बाद निकाले जा रहे ‘मुजफ्फराबाद चलो’ मार्च को रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया। PoK में यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब पिछले दो महीनों से शासन, महंगाई, बिजली दरों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। JAAC ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया था और आरोप लगाया कि मौजूदा माहौल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के अनुकूल नहीं है। भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र पर उसका अवैध कब्जा है। भारत ने हाल के महीनों में PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई और प्रशासनिक दमन पर भी चिंता जताई है।



















