नई दिल्ली: राज्य सभा में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने देश में कुपोषण और रक्ताल्पता (एनिमिया) की रोकथाम, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों के उपयोग और अंतर-विभागीय समन्वय को लेकर सवाल उठाए। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने इन प्रश्नों का विस्तृत उत्तर सदन के पटल पर प्रस्तुत किया।
सांसद का सवाल : क्या मिशन के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणालियों और डिजिटल स्वास्थ्य ट्रैकिंग के उपयोग की परिकल्पना की गई है?
महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब : ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। राशन के वितरण (Take Home Ration – THR) की अंतिम लाभार्थी तक ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के लिए इस ऐप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित चेहरे की पहचान प्रणाली (Face Recognition System – FRS) शुरू की गई है, जिससे केवल पंजीकृत पात्र लाभार्थियों को ही लाभ मिले।
सांसद का सवाल : आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूली बच्चों के लिए ‘डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड’ तथा गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के लिए ‘मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड’ लागू करने की क्या योजना है?
महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब: मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम 2.0 के तहत मोबाइल स्वास्थ्य टीमों (MHT) द्वारा आंगनवाड़ी और स्कूलों के बच्चों की जांच के बाद उनके लिए डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। पोषण ट्रैकर के 8.96 करोड़ पंजीकृत लाभार्थियों (जून 2026 तक) में से 5.02 करोड़ की ‘आभा’ (ABHA) आईडी बनाई जा चुकी है।3-6 वर्ष के 3.6 करोड़ बच्चों में से 1.12 करोड़ बच्चों को ‘एपीएएआर’ (APAAR) आईडी दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और परामर्श की निगरानी के लिए मातृ एवं शिशु संरक्षण (MCP) कार्ड जारी किया जा रहा है।
सांसद का सवाल : क्या सरकार जनजातीय/आकांक्षी जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2035 तक कुपोषण में 70% और एनीमिया में 60% की कमी का समयबद्ध लक्ष्य रखती है?
महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब : कुपोषण को दूर करने के लिए केवल भोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए स्वच्छता, शिक्षा और सुरक्षित पेयजल जैसे कारक भी जरूरी हैं। सरकार की नीति के तहत ‘समग्र दृष्टिकोण’ (Whole of Government Approach) अपनाते हुए देश में कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम को उच्च प्राथमिकता दी गई है, और जनजातीय तथा आकांक्षी ब्लॉकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
सांसद का सवाल : मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संबंधित मंत्रालयों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब : मिशन पोषण 2.0 के तहत 18 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है:
जनजातीय कार्य मंत्रालय: ‘धरती आबा जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ के तहत 875 और ‘पीएम-जनमन’ योजना के तहत पीवीटीजी (PVTG) क्षेत्रों में 2,500 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण की मंजूरी दी गई है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय: मनरेगा (MGNREGA), सांसद निधि और अन्य योजनाओं के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण और बुनियादी ढांचा सुदृढ़ किया जा रहा है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के प्रबंधन हेतु प्रोटोकॉल जारी किया गया है। इसके अलावा ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के जरिए 7 प्रमुख लाभार्थी समूहों में एनीमिया कम करने के उपाय लागू किए जा रहे हैं।
जन आंदोलन: 2018 से अब तक पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के तहत 150 करोड़ से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। वहीं, पोषण ट्रैकर पर अप्रैल 2022 से जून 2026 तक 10.5 करोड़ से अधिक समुदाय आधारित कार्यक्रम (CBE) दर्ज किए गए हैं।



















