Washington: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने आधी सदी तक अपने आचरण से इस भावना को नष्ट कर दिया। ‘न्यूजवीक’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में क्वात्रा ने कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित करना कोई नयी स्थिति पैदा करना नहीं है, बल्कि पहले से बिगड़े हुए संबंधों को औपचारिक रूप से स्वीकार करना है। क्वात्रा ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का स्पष्ट रुख व्यक्त किया है: ‘आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते… आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते… पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।”’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिस जल संकट का सामना कर रहा है, वह इस्लामाबाद की सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है।
क्वात्रा का यह लेख ऐसे समय में प्रकाशित हुआ है, जब पाकिस्तान ने भारत द्वारा 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले के विरोध में हाल ही में एक सम्मेलन आयोजित किया था। भारत ने यह निर्णय 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या के एक दिन बाद लिया था। मारे गए लोगों में अधिकतर पर्यटक थे। क्वात्रा ने लिखा, ”यह याद रखना चाहिए कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि इसे ‘सद्भावना और मित्रता की भावना’ से किया गया था। पाकिस्तान ने आधी सदी तक इसी सद्भावना और मित्रता को नष्ट करने का काम किया। संधि को स्थगित रखना केवल उस स्थिति को स्वीकार करना है, जिसे पाकिस्तान अपने आचरण से पहले ही समाप्त कर चुका था।” वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी तंत्र की छह नदियों में से तीन नदियों का नियंत्रण भारत को मिला, जिनमें बेसिन के लगभग 20 प्रतिशत जल का प्रवाह होता है जबकि पाकिस्तान को उन नदियों पर अधिकार मिला, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत जल प्रवाहित होता है।



















