स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पत्रकार अमन चोपड़ा के बीच हुए इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर खासी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रॉडकास्ट के दौरान अमन चोपड़ा द्वारा पूछे गए तीखे सवालों से न केवल स्वामी जी बल्कि उनके शिष्य और समर्थक भी नाराज हो गए। गुस्साए समर्थकों ने पत्रकार पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद अमन चोपड़ा मुश्किल से वहां से बचकर निकल पाए। यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पत्रकार के सवाल पर भड़ गए स्वामी जी
इंटरव्यू में अमन चोपड़ा ने स्वामी जी से कई सवाल पूछे। एक सवाल में उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी के बारे में पूछा कि क्या यह सही है। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए और कहा कि उनकी नजर में यह सही है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी 20 दिन से शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो पत्थरबाजी की गई, जिसमें कोई गलत नहीं है।
इंटरव्यू के दौरान बंद कर दी गई लाइट
ऐसे सवालों पर शिष्य और समर्थक नाराज हो गए। इंटरव्यू के दौरान लाइट बंद कर दी गई। स्वामी जी और पत्रकार की बातचीत के दौरान पास मौजूद शिष्य मीडियाकर्मियों पर भड़क उठे। पहले बहस हुई, फिर शिष्य उग्र हो गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिगड़े माहौल को संभालने की कोशिश करते रहे और अपने शिष्यों को बार-बार शांत रहने की अपील करते दिखे।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग स्वामी जी का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ पत्रकार की हिम्मत और संयम की तारीफ कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं:
मुकेश कुमार स्वर्णकार ने लिखा, ‘संतों को यह सब शोभा नहीं देता। देख लो ये सारे संत कितने उग्र रूप से पेश आ रहे हैं और पत्रकार महोदय कितनी धैर्य और शालीनता से बात कर रहे हैं। अगर यह सब कैमरे के सामने नहीं होता तो ये संत आक्रमण भी कर सकते थे। संतों को राजनीति में नहीं आना चाहिए, सिर्फ ईश्वर की भक्ति में लीन रहना चाहिए।’
योगी भट्ट ने लिखा, ‘गुंडों जैसे संतों के बीच फंस गए पत्रकार अमन जी, आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। ऑन कैमरा न होते तो न जाने क्या ही करते ये कथित संत लोग।’
आद्या प्रसाद पांडेय ने लिखा, ‘अमन जी आप सही एवं साहसी पत्रकार हैं जो इस कालनेमि के सामने इसके वास्तविक चरित्र को बड़े ही संयम से उजागर किया। पत्थर को सही ठहराना उचित नहीं।’
@ankitbudania1180 ने लिखा, ‘कॉकरोच मंच से हिंदू धर्म को गालियां दी गईं, इस पर हम एक शब्द भी नहीं बोलेंगे क्योंकि वह प्रदर्शन भाजपा के खिलाफ था। गजब का शंकराचार्य है।’
शंभू शरण सिंह ने लिखा, ‘ये पत्रकार मोदी का दलाल मीडिया है।’
चंद्रपाल यादव ने लिखा, ‘छी छी गोदी मीडिया।’
कृपाल तिवारी ने लिखा, ‘पत्रकारिता और दलाली दो अलग-अलग चीजें हैं।’
कुछ यूजर्स ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। यह घटना पत्रकारिता और धार्मिक नेताओं के बीच संवाद की चुनौतियों को रेखांकित करती है।



















