आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। अक्सर हम शरीर में होने वाले मामूली बदलावों को सामान्य समझकर टाल देते हैं लेकिन यही लापरवाही कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है। ऐसी ही एक आम लगने वाली समस्या है गले में लंबे समय तक खराश रहना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गले की खराश हफ्तों तक ठीक न हो तो इसे हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। यह सिर और गर्दन (Head and Neck) के कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
मौसम बदलने पर फ्लू या वायरल इन्फेक्शन के कारण गले में खराश होना सामान्य बात है जो आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है लेकिन अगर यह समस्या लगातार 2 हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा यदि गले की खराश के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें तो तुरंत जांच करवाएं। आवाज का बैठ जाना या लंबे समय तक भारी रहना। मुंह के अंदर ऐसा छाला या घाव जो आसानी से न भर रहा हो। खाना खाने या पानी पीने के दौरान दर्द होना। गर्दन के आसपास कोई गांठ या अचानक सूजन आना।
वहीं डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है क्योंकि वे इन शुरुआती लक्षणों को साधारण समस्या समझकर टालते रहते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार जब सिर और गर्दन के हिस्से की कोशिकाओं में अनियंत्रित और असामान्य वृद्धि होने लगती है तो यह कैंसर का रूप ले लेती है।
भारत में इसके मुख्य कारण ये हैं: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पान मसाला का इस्तेमाल और अत्यधिक शराब पीना इसका सबसे बड़ा कारण है। दांतों और मसूड़ों की सही तरीके से सफाई न करना और मुंह में लगातार इन्फेक्शन रहना। यदि परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा हो और व्यक्ति धूम्रपान भी करता हो तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
अगर समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए तो हेड एंड नेक कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है। गले या मुंह की कोई भी समस्या 14 दिनों से अधिक रहने पर तुरंत नाक-कान-गला (ENT) डॉक्टर को दिखाएं। तंबाकू, सिगरेट और शराब का पूरी तरह त्याग करें। रोजाना दांतों और जीभ की अच्छी सफाई करें। अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार शामिल करें। 40 की उम्र के बाद या जोखिम कारक वाले लोग समय-समय पर अपनी रुटीन हेल्थ जांच कराते रहें।
डिसक्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है।



















