जयपुर: राजधानी जयपुर की सड़कों पर जब वो बच्चे उतरे जिनकी आवाज उनके होठों से नहीं निकलती, तो शहर की खामोशी चीख उठी। राजकीय सेठ पोद्दार सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर द डेफ (मूक-बधिर) के छात्र-छात्राएं मंगलवार को अपने ही हॉस्टल और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ न्याय मांगने सड़कों पर धरने पर बैठ गए। हॉस्टल की बदहाली, गिरता शैक्षणिक स्तर और गंभीर उत्पीड़न के आरोपों ने पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में भी उबाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक भावुक और आक्रामक पोस्ट साझा की है।
डोटासरा बोले- प्रशासन बहरा और व्यवस्था पूरी तरह गूंगी हो चुकी है
डोटासरा ने अपने x पोस्ट पर लिखा कि ‘अगर जो बच्चे सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते, उन्हें भी न्याय के लिए सड़क पर बैठना पड़े, तो समझिए बच्चे मूक-बधिर नहीं हैं। मूक-बधिर प्रदेश की संवेदनहीन भाजपा सरकार है, जिसका प्रशासन बहरा और व्यवस्था पूरी तरह गूंगी हो चुकी है।’
डोटासरा ने आगे कहा कि यह राजस्थान की जनता का दुर्भाग्य है कि विशेष योग्यजन बच्चों को भी अपने जायज़ अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के संस्थानों का क्या हाल बना दिया है?
हॉस्टल की बदहाली और गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। सफाई, गुणवत्तापूर्ण भोजन और सुरक्षित माहौल की जगह बच्चे लंबे समय से अव्यवस्थाओं और उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। जब बार-बार शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं हुई, तो मूक-बधिर बच्चों का सब्र टूट गया और उन्होंने पोस्टर-तख्तियों के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया।
डोटासरा ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा, ‘जयपुर के इस प्रतिष्ठित स्कूल के बच्चों का सड़क पर आना सरकार के लिए बेहद शर्मनाक है। सरकार जवाब दे कि क्या आपकी जिम्मेदारी केवल प्रचार और झूठी बयानबाजी तक सीमित है, या प्रदेश के दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना भी आपकी प्राथमिकता है?’



















