सीकर: शेखावाटी की सियासत में सीकर जिले को लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि, मौजूदा स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी इस राजनीतिक आधार को चुनौती देने के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। सीकर, लक्ष्मणगढ़, लोसल और रामगढ़ शेखावाटी में बहुमत के समीकरण कांग्रेस के पक्ष में होने के बावजूद भाजपा की ओर से लगातार सियासी दांव-पेंच आजमाए जा रहे हैं।
बहुमत के बावजूद कांग्रेस हुई सतर्क
स्थानीय निकायों में बहुमत का आंकड़ा किसी भी दल के लिए राहत की स्थिति पैदा करता है, लेकिन सभापति या अध्यक्ष के चुनाव में केवल संख्या ही निर्णायक नहीं होती। अंतिम दौर में पार्षदों की एकजुटता, राजनीतिक प्रबंधन और दोनों दलों की रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि बहुमत के बावजूद कांग्रेस अपने पार्षदों को लेकर पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रही है।
डोटासरा, पारीक और हाकम अली की तिकड़ी
दूसरी ओर भाजपा के सामने चुनौती केवल स्थानीय निकायों में सत्ता हासिल करने की नहीं है। यदि सीकर जिले के प्रमुख निकायों में वह कांग्रेस के बहुमत को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रहती है, तो इसका राजनीतिक संदेश शेखावाटी से बाहर भी जा सकता है। क्योंकि इन क्षेत्रों के विधायक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री वह वरिष्ठ विधायक राजेंद्र पारीक और विधायक हाकम अली है। भाजपा की रणनीति को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
शेखावाटी में चल रही जोड़-तोड़ की राजनीति
सीकर, लक्ष्मणगढ़, लोसल और रामगढ़ शेखावाटी में चल रही जोड़-तोड़ और राजनीतिक सक्रियता ने स्थानीय चुनावों को महज अध्यक्ष या सभापति के चुनाव तक सीमित नहीं रहने दिया है। दोनों प्रमुख दलों के लिए यह अपनी संगठनात्मक ताकत और पार्षदों पर पकड़ दिखाने की परीक्षा भी बन गया है। ऐसे में आने वाले अगले दो दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बहुमत के आंकड़े कांग्रेस को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाते हैं या भाजपा अपने राजनीतिक प्रबंधन के जरिए इन निकायों में नए समीकरण बनाने में सफल होती है। फिलहाल, शेखावाटी की इस सियासी जंग में हर कदम पर नजर है और दोनों दल किसी भी संभावना को खुला छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।



















