अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने एक बड़े और अहम फैसले में राज्यभर में गुजरात ने नॉन-स्टैंडर्ड एनालॉग पनीर, बटर और चीज पर रोक लगा दी है। बुधवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने सरकार के निर्णय का ऐलान किया। पानसेरिया ने कहा कि राज्य में सरकार के फैसले के बाद इनका उत्पादन, संग्रहण और बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। राज्य सरकार ने यह निर्णय लोगों की सेहत की सुरक्षा, खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा और ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया है। सरकार ने घटिया क्वालिटी वाले एनालॉग पनीर, चीज और बटर पर पूरे राज्य में पूरी तरह से रोक लगाने का ऐलान किया है।
‘ग्राहकों को किया जा रहा गुमराह’
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने यह फैसला राज्य के फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) द्वारा बड़े पैमाने पर सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग के बाद लिया। इस जांच में बाजार में घटिया क्वालिटी वाले, सिंथेटिक डेयरी सब्स्टिट्यूट (डेयरी उत्पादों के नकली विकल्प) के कई मामले सामने आए थे। मंत्री पासारिया ने कहा कि गुजरात देश का प्रमुख डेयरी राज्य है, जहां लाखों दूध उत्पादक किसान अच्छी क्वालिटी के डेयरी उत्पाद पहुचाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। जब ग्राहक पनीर खरीदते हैं, तो उन्हें शुद्ध दूध से बना असली पनीर मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन, पनीर के नाम पर बेचे जाने वाले उत्पाद जो वेजिटेबल ऑयल और डेयरी-इतर चीजों से बनते हैं। ग्राहकों को गुमराह कर रहे हैं, असली डेयरी किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और खाने-पीने की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने जारी की अपील
पानसेरिया ने कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSA), 2006 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार ने पूरे गुजरात में घटिया क्वालिटी वाले एनालॉग पनीर, बटर और चीज़ के उत्पादन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर रोक लगा दी है। जो कोई भी व्यक्ति या फ़ूड बिज़नेस ऑपरेटर (FBO) इस रोक का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा, उसे FSSA, 2006 के तहत कड़ी कानूनी सज़ा का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने गुजरात के सभी मैन्युफैक्चरर्स, व्यापारियों, होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और फूड ऑपरेटर्स से अपील की है कि वे कानून का सख्ती से पालन करें और केवल असली, स्टैंडर्ड के मुताबिक डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल करें।
क्या है एनालॉग पनीर, समझें
- एनालॉग पनीर असली दूध से नहीं बल्कि पानी, सस्ते मिल्क पाउडर, स्टार्च और पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों को आपस में मिलाकर बनाया जाता है। तेल और पानी को जोड़ने के लिए इसमें इमल्सिफायर रसायन डाले जाते हैं। इस नकली घोल को गर्म करके एसिड से फाड़ा जाता है जिससे यह बिल्कुल असली पनीर जैसा ठोस और सफेद दिखने लगता है।
- तेल और पानी सामान्य रूप से नहीं मिलते हैं, इसलिए इन्हें जोड़ने और चिकनापन लाने के लिए इमल्सिफायर रसायन मिलाए जाते हैं।
- प्राकृतिक रूप से शुद्ध दूध को नींबू या सिरके से फाड़कर बनता है। इसमें प्राकृतिक प्रोटीन और पोषक तत्व होते हैं।
- एनालॉग पनीर वनस्पति वसा, स्टार्च और केमिकल से बनता है। यह काफी सस्ता होता है और इसका उपयोग अक्सर होटल और ढाबों में लागत बचाने के लिए किया जाता है। इसमें जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है और लगातार सेवन से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
अच्छी क्वालिटी का खाना पहली प्राथमिकता
सरकार का यह निर्देश गुजरात के शुद्ध भोजन सुरक्षित ग्राहक के साथ ‘स्वस्थ गुजरात’ के बड़े संकल्प का समर्थन करता है। स्वास्थ्य मंत्री ने फिर से ज़ोर देकर कहा कि राज्य की डेयरी इंडस्ट्री की सुरक्षा करते हुए हर नागरिक को सुरक्षित, अच्छी क्वालिटी का और असली भोजन उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गौरतलब हो गुजरात के डेयरी ब्रांड अमूल की देश ही नहीं दुनिया के तमाम मुल्कों में धाक है।



















