भुवनेश्वर: ओडिशा के संबलपुर निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने GM यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान ‘जेन Z’ (आज की युवा पीढ़ी) और उनकी उम्मीदों का मुद्दा उठाया। प्रधान ने कार्यक्रम में बोलते हुए आज के तेजी से बदलते समाज में युवा पीढ़ी को समझने की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया। बता दें कि हाल ही में NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘जेन Z’ (आज की युवा पीढ़ी) को एक ऐसी ताकत बताया जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि देश के युवाओं के संकल्प और उम्मीदों के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं।
‘मेरे लिए मंत्री पद नहीं था प्रतिष्ठा’
हल्के-फुल्के अंदाज़ में बात करते हुए, संबलपुर के सांसद ने कहा कि उन्हें ‘जेन Z’ की जिद की वजह से परेशानी हुई, लेकिन उन्हें यह एहसास हुआ कि नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उन्हें समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ लोगों ने ‘जेन Z’ को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन मंत्री का पद मेरे लिए प्रतिष्ठा का सवाल बिल्कुल नहीं था।
जेनजी के त्याग का किया जिक्र
15-25 साल की उम्र के लगभग 20 करोड़ युवाओं का ज़िक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि अगर 20 करोड़ युवा किसी चीज के लिए ठान लें, तो उनके संकल्प के सामने मेरी ज़िम्मेदारी कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री को समझाने की कोशिश की, और बाद में प्रधानमंत्री ने सीधे युवाओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि देश का हित सबसे ऊपर है। संबलपुर के सांसद ने कहा कि हर पीढ़ी में ऐसे युवा हुए हैं जिन्होंने देश के लिए त्याग किया है। प्रधान ने कहा कि इतिहास गवाह है कि युवाओं ने ही बदलाव की अगुवाई की है और त्याग किया है। वे अपने समय के ‘जेन Z’ ही थे।
प्रधान ने इस बात पर भी जोर दिया कि माता-पिता, शिक्षकों और समाज की यह जिम्मेदारी है कि वे युवाओं की सिर्फ आलोचना करने के बजाय उन्हें समझें और साथ ही उन्हें अच्छे मौकों और गुमराह करने वाली चीजों के बीच फर्क करना सिखाएं। GM यूनिवर्सिटी में उनके भाषण का मुख्य विषय युवाओं को सशक्त बनाने, शिक्षा और ज़िम्मेदार भागीदारी का महत्व था। उन्होंने यह अहम संदेश भी दिया कि भारत की तरक्की काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी युवा पीढ़ी को कितनी अच्छी तरह समझता है, उनका मार्गदर्शन करता है और उन्हें सशक्त बनाता है।



















