40-50 के दशक में इस अभिनेता ने तकरीबन 9 बार राम की भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में जगह बना ली थी। लोग इनके कट आउट निकालकर इनकी पूजा करते थे।

नई दिल्ली। रणबीर कपूर की रामायण (Ramayana) ने एक बार फिर से हमारे पौराणिक कहानी को बड़े पर्दे पर देखने की उत्सुकता जगा दी है। भले ही यह कहानी कई बार सिल्वर स्क्रीन पर उतारी जा चुकी है लेकिन कुछ दशकों में जब फिर से इसे बनाया जाता है तो दर्शकों की एक्साइटमेंट वैसी ही रहती है बल्कि उम्मीद भी बढ़ जाती है।

इन दिनों रणबीर कपूर की फिल्म रामायण को लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है. फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद से फैंस की उत्सुकता और भी बढ़ गई है. इसमें रॉकस्टार रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी सिनेमा में एक ऐसा एक्टर भी हुआ है, जिसे पर्दे पर भगवान श्रीराम का सबसे लोकप्रिय चेहरा माना जाता है? उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 9 बार श्रीराम का किरदार निभाया. उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि लोग उनके पोस्टर घरों में लगाकर पूजा करने लगे थे. लेकिन अफसोस करोड़ों दिलों पर राज करने वाला यह सितारा महज 42 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गया था. 

‘सिल्वर स्क्रीन के राम’ क्यों कहलाए प्रेम अदीब?

10 अगस्त 1917 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे प्रेम अदीब अपने दौर के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे. उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें असली पहचान भगवान श्रीराम के किरदार से मिली. उनकी सादगी, शानदार एक्टिंग और शांत व्यक्तित्व ने दर्शकों का दिल जीत लिया. साल 1942 में डायरेक्टर विजय भट्ट की फिल्म भरत मिलाप में पहली बार उन्होंने श्रीराम की भूमिका निभाई. फिल्म सुपरहिट रही, जिसके बाद विजय भट्ट ने उन्हें राम राज्य (1943) में भी श्रीराम बनाया. राम राज्य भारतीय सिनेमा के इतिहास की इकलौती हिंदी फिल्म मानी जाती है, जिसे महात्मा गांधी ने देखा था.

9 फिल्मों में बने श्रीराम, लोग करने लगे थे पूजा

भरत मिलाप और राम राज्य की सफलता के बाद प्रेम अदीब की छवि श्रीराम के रूप में ऐसी बनी कि दर्शक उन्हें बार-बार उसी किरदार में देखना चाहते थे. उन्होंने रामबाण, राम विवाह, राम नवमी, राम हनुमान युद्ध, राम लक्ष्मण, राम भक्त विभीषण और 1954 की रामायण सहित कुल 9 फिल्मों में भगवान श्रीराम का किरदार निभाया. उनकी जोड़ी एक्ट्रेस शोभना समर्थ के साथ बेहद लोकप्रिय हुई. दोनों को लोग असली ‘राम-सीता’ मानने लगे थे. उस दौर में उनके पोस्टर और कटआउट की पूजा तक की जाती थी. 

महज 42 साल में बुझ गया चमकता सितारा

सफलता के शिखर पर पहुंचे प्रेम अदीब की जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं रही. 25 दिसंबर 1959 को ब्रेन हेमरेज के कारण उनका निधन हो गया. उस समय उनकी उम्र केवल 42 वर्ष थी. उनके अचानक चले जाने से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी पहचान सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि आस्था के प्रतीक के रूप में भी थी.

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930