Bihar Panchayat Election: बिहार में इस साल पंचायत चुनाव होने की संभावना कम है. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की तैयारी शुरू कर दी है. चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों की सीमाएं तय करने में ही 6 महीने से ज्यादा समय लग सकता है. इसके बाद आरक्षण, वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों की तैयारी में करीब 6 महीने और लगेंगे. ऐसे में पंचायत चुनाव 2027 में होने की संभावना है.
पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है
बिहार पंचायत चुनाव की तैयारी के तहत सबसे पहले पंचायतों का परिसीमन किया जाएगा. आसान भाषा में समझें तो इसमें पंचायतों और चुनाव वाले क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी. इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग पहले जरूरी गाइडलाइन तैयार करेगा.
इसी गाइडलाइन के आधार पर सभी जिलों में डीएम यानी जिला निर्वाचन पदाधिकारी की देखरेख में परिसीमन का काम होगा. राज्य निर्वाचन आयोग में इसको लेकर बैठकें भी शुरू हो गई हैं.
बिहार में तीन स्तरों वाले पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है.
इसके बाद 6 महीने और चलेंगे चुनाव की तैयारी के काम
पंचायतों की नई सीमाएं तय होने के बाद चुनाव की तैयारी खत्म नहीं होगी. इसके बाद अलग-अलग पदों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा. नई वोटर लिस्ट तैयार होगी और मतदान केंद्र भी तय किए जाएंगे. इन सभी कामों को पूरा करने में करीब 6 महीने और लग सकते हैं. इस तरह परिसीमन से लेकर चुनाव की बाकी तैयारियों तक करीब एक साल का समय लगने की संभावना है.
यही वजह है कि बिहार में पंचायत चुनाव 2026 में होने की संभावना नहीं मानी जा रही है. मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए अब पंचायत चुनाव 2027 में होने की संभावना ज्यादा है.
2011 की जनगणना से तय होंगी पंचायतों की सीमाएं
पंचायतों का नया नक्शा 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर तैयार किया जाएगा. आयोग गांवों की आबादी और इलाके की भौगोलिक स्थिति को देखेगा. इसके आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र, प्रादेशिक चुनाव क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद के क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाएंगी. यह पूरा काम बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के नियमों के तहत किया जाएगा.
गांवों के नक्शे और आबादी का भी होगा हिसाब
सीमाएं तय करने के बाद गांवों के नए नक्शे तैयार किए जाएंगे. इसके साथ ही प्रखंड के हिसाब से आबादी और मतदाताओं की संख्या का भी हिसाब लगाया जाएगा. ग्रामीण इलाकों के लिए सीईबी ले-आउट मैप तैयार किया जाएगा. इसके जरिए यह साफ किया जाएगा कि कौन सा इलाका किस पंचायत और चुनाव क्षेत्र में आएगा.
लोगों से भी मांगी जाएगी आपत्ति और सुझाव
परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इसकी जानकारी सरकारी गजट में प्रकाशित की जाएगी. इसके बाद आम लोगों को अपनी आपत्ति और सुझाव देने का मौका मिलेगा. अगर किसी व्यक्ति या क्षेत्र को नई सीमा को लेकर कोई परेशानी या आपत्ति होगी तो वह अपनी बात रख सकेगा. मिली हुई आपत्तियों और सुझावों की जांच के बाद जरूरी बदलाव किए जाएंगे. इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा.
डीएम की होगी बड़ी जिम्मेदारी
पंचायतों की नई सीमाएं तय करने में जिलाधिकारियों की भी अहम भूमिका होगी. राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश और निगरानी में सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी नए पंचायत क्षेत्रों की सीमा तय कराने का काम पूरा कराएंगे. यानी आयोग पूरे राज्य के लिए नियम और दिशा-निर्देश तय करेगा, जबकि जिलों में उसके आधार पर परिसीमन का काम कराया जाएगा.
परिसीमन के बाद बनेगा नया आरक्षण रोस्टर
पंचायतों की नई सीमाएं तय होने के बाद अलग-अलग पदों के लिए नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा. इसमें अनुसूचित जाति यानी SC, अनुसूचित जनजाति यानी ST, अत्यंत पिछड़ा वर्ग यानी EBC और महिलाओं के लिए सीटों का अनुपात तय होगा.
इसका मतलब है कि परिसीमन के बाद कई पंचायतों में आरक्षित और सामान्य सीटों की स्थिति भी बदल सकती है. इसलिए संभावित उम्मीदवारों को चुनाव से पहले नए आरक्षण की जानकारी का इंतजार करना होगा.
नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होगा मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल
बिहार में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है. राज्य में पिछली बार पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे. 2021 का पंचायत चुनाव सितंबर से दिसंबर के बीच कराया गया था. इस चुनाव में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद समेत पंचायतों के अलग-अलग पदों के लिए मतदान हुआ था.
अब 2026 में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले नई पंचायत व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है. लेकिन परिसीमन, आरक्षण, वोटर लिस्ट और मतदान केंद्र तय करने में लगने वाले समय को देखते हुए अगले पंचायत चुनाव 2027 में होने की संभावना बन रही है.



















