शायद टाइटल पढ़कर आप भी आश्चर्य में पड़ गये होंगे कि ऐसा भी कोई शख्स होगा जो सिरहाने पर करोड़ों रुपये के सोने को रखकर सोता रहा। लेकिन ऐसा हुआ है और यह शख्स कोई और नहीं बल्कि एक चोरी का आरोपी है, जिसे पुलिस तलाश कर रही थी। हुआ यूं कि दिल्ली के कालकाजी इलाके में हुई 25 किलोग्राम सोने की चोरी का मामला सुलझा लिया है। वो भी महज एक मोबाइल नंबर की मदद से। दिलचस्प यह है कि घटना को अंजाम देने के बाद चोर 13 करोड़ कीमत का सोना, सिरहाने रखकर सो गया। जबकि पुलिस और जूलरी शॉप मालिक की नींद उड़ी हुई थी। वे सब चोरों और माल की तलाश में दिन-रात जागकर, सड़कों पर दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। गुरुवार को घटना का खुलासा हो जाने की पुष्टि दक्षिणी पूर्वी दिल्ली जिला डीसीपी ने मीडिया से सामने की। गिरफ्तार चोरों का नाम जावेद (26) और नूर सिकंदर (25) है। दोनो ही बंगाल के रहने वाले हैं. जिला पुलिस के मुताबिक अंजलि ज्वैलर्स में हुई इस सनसनीखेज वारदात के सिलसिले में कालकाजी थाने में मामला दर्ज किया गया था। घटना के खुलासे की जिम्मेदारी एसएचओ इंस्पेक्टर कालकाजी संदीप घई को दी गई थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बीते 50 साल में भी यह फार्मूला कभी किसी चोर ने नहीं आजमाया था, जो इस घटना में आजमाया गया। अंजलि ज्वैलर्स की पहरेदारी में लगाए गए प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड दुकान के बाहर पहरा दे रहे थे। जबकि अंदर से चोर सोने की दुकान खाली कर गए। चोरों ने दुकान में प्रवेश छत को काटकर किया था। इसलिए दुकान के मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे गार्ड को कानो-कान भनक तक नहीं लगी। जब पुलिस चोरों की तलाश में लगी, तो मौके से पुलिस को कुछ फिंगर प्रिंट मिले। बाकी और कुछ ऐसा हाथ नहीं लगा कि, जिससे तुरंत चोरों तक पहुंचा जा सकता। इसी बीच चोरी की इस बड़ी वारदात को सुलझाने में जुटी टीम में शामिल सब-इंस्पेक्टर विनोद कुमार मीणा को एक मोबाइल नंबर हाथ लग गया। मोबाइल की कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) खंगाली गई। तो उसमें वारदात के कुछ समय बाद आई एक मोबाइल नंबर पर जाकर पुलिस रुक गई। इस मोबाइल से अंतिम बार 17 सेकेंड बात की गई थी। मुश्किल तब फिर आ गई जब पुलिस को संबंधित मोबाइल नंबर बंद मिले। मोबाइल नंबर बंद मिलने के करीब एक-दो घंटे बाद ही एक मोबाइल पर पुलिस द्वारा भेजा गया मैसेज डिलीवर हो गया. इस पूरी पड़ताल की सफलता का राज ही, दरअसल इलेक्ट्रॉनिक-सर्विलांस रहा है. मैसेज डिलीवर होते ही पुलिस टीम ने मोबाइल की लोकेशन निकाल ली. वो लोकेशन मध्य दिल्ली जिले के करोल बाग इलाके की थी. कालकाजी थाना पुलिस की टीमों ने करोल बाग में छापा मारकर, जावेद को पकड़ लिया. जावेद की निशानदेही पर पुलिस को नूर सिकंदर मिल गया. दोनो ने चोरी की बात कबूल ली. दोनो ही बंगाल में एक ही गांव के रहने वाले हैं. पुलिस ने जब नूर सिकंदर से चोरी किए सोने के बारे में पूछा तो, उसने सोना बरामद करा दिया. चोर 13 करोड़ की कीमत का 25 किलोग्राम चोरी किए सोने के तकिए के नीचे (सिरहाने) रखकर सो गया था. दरअसल पड़ताल के शुरुआती दौर में पुलिस को पता चल चुका था कि अंजलि ज्वैलर्स पर अस्थाई रुप से काम करने वाला नूर सिकंदर 9 जनवरी 2021 से गायब है. नूर सिकंदर-जावेद ज्वैलरी शॉप पर डायमंड के टुकड़ों से संबंधित छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं. कालकाजी पुलिस की माने तो, चोरी की इस बड़ी घटना के पीछ इकलौता और पूरा दिमाग नूर सिकंदर का है. पूरी प्लानिंग नूर सिकंदर ने बनाई थी. चूंकि उसे इस बड़ी वारदात को एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम देना था. इसीलिए वो 9 जनवरी से गायब हो गया था. कालकाजी पुलिस के एक उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक आरोपी नूर सिकंदर चालाक बनने की कोशिश में तो सफल रहा. मगर वो वारदात के बाद खुद को बचा नहीं पाया. पुलिस टीमों द्वारा की गई पूछताछ में चोरों ने माना कि अगर वे बुधवार को दबोच न लिये जाते, तो उनका प्लान राजधानी ट्रेन से दिल्ली से हावड़ा भाग जाने का था. अगर ऐसा करने में वे कामयाब होते तो पुलिस को उन तक पहुंचने के लिए और भी पापड़ बेलने पड़ते. पुलिस अगर वक्त रहते इन तक न पहुंचती, तो चोर सोने को ठिकाने लगा चुके होते. दिल्ली पुलिस (कालकाजी थाना पुलिस) को खुद पर भी हैरत हो रही है कि आखिर उसने इस मामले को इतनी जल्दी खोल डाला. पुलिस टीमों की रुह यह सोचकर गुरुवार को कांप जा रही थी कि कहीं चोर दिल्ली से बाहर पहुंच कर सोने को ठिकाने लगा देते तो बड़ी छीछालेदर हो जाती. साथ ही पुलिस के हाथ शुरुआत में ही एक वो नंबर जिसे नूर सिकंदर चला रहा था, का मिल जाना भी तफ्तीश में मील का पत्थर साबित हुआ. इसमें भी कोई दो राय नहीं है.

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