अमेरिका के ट्रेजरी प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” लगाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि इन प्रतिबंधों से ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाया जा सकेगा और इससे बड़े पैमाने पर नए सैन्य अभियान की जरूरत कम हो सकती है।

बेसेंट की यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक दिन पहले ईरान के खिलाफ “आर्थिक युद्ध” की चेतावनी दिए जाने के बाद आई है। ट्रंप ने उन देशों को भी आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी, जो ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद या राहत देते हैं। बेसेंट ने कहा कि नए प्रतिबंधों का विस्तृत खाका सोमवार को सामने रखा जाएगा।

ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी

बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ईरान के शासन पर दबाव बढ़ाना है और संभवतः बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता को कम करना है।

अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीने से जारी युद्ध के बीच हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। इस संघर्ष में खाड़ी देश भी प्रभावित हुए हैं और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही को प्रभावित करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कारोबार होने वाला तेल इसी मार्ग से गुजरता था।

अप्रैल और जून में अमेरिका और ईरान ने दो बार युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी। इनका उद्देश्य होर्मुज के जरिए समुद्री यातायात को सामान्य करना और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना था, लेकिन दोनों समझौते जल्द ही विफल हो गए।

सोमवार को प्रतिबंधों का ब्योरा देंगे बेसेंट

बेसेंट ने कहा कि वह सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए प्रतिबंध पैकेज की विस्तृत जानकारी देंगे। उन्होंने इसे “एक-दो मुक्कों” वाली रणनीति बताया, जिसमें ईरान पर पहले से लागू नाकाबंदी के साथ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सरकार पर इतना आर्थिक दबाव बनाना है कि उसके शासन में बदलाव हो सके। बेसेंट ने अमेरिका के सहयोगियों और दुनिया के अन्य देशों से भी इस अभियान में साथ आने की अपील की।

ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन्हें “आर्थिक आतंकवाद” बताया और कहा कि इससे ईरान की स्वतंत्रता, गरिमा और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने के उसके संकल्प में कोई कमी नहीं आएगी।

चीन पर भी अमेरिका का दबाव

ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति में चीन एक महत्वपूर्ण पक्ष है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान से समुद्री मार्ग से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से अधिक चीन खरीदता है।

जब बेसेंट से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ कारोबार करने के लिए अमेरिका चीन को भी निशाना बना सकता है, तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कई बातचीत निजी तौर पर करना बेहतर होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है और इसलिए उसे अमेरिकी अभियान के साथ सहयोग करना चाहिए।

हालांकि, चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन नहीं किया। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या का समाधान करने में मदद नहीं करते। चीन ने संबंधित पक्षों से जिम्मेदारी से काम लेने और राजनीतिक एवं कूटनीतिक माध्यमों से समाधान निकालने का आह्वान किया।

ट्रंप ने दी थी ‘आर्थिक युद्ध’ की चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर ईरान के खिलाफ “अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव” की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो भी देश ईरान को वित्तीय संस्थानों, कारोबार, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के जरिए किसी भी तरह की मदद उपलब्ध कराएगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप की चेतावनी को अमेरिकी जनता का ध्यान घरेलू आर्थिक समस्याओं से हटाने की कोशिश बताया। उन्होंने अमेरिका के रिकॉर्ड कर्ज और बढ़ती ब्याज दरों का भी उल्लेख किया।

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