देश में एक ओर जहां तरह-तरह के नशों का सेवन बढ़ रहा है वहीं नशा छुड़ाने के नाम पर खोले गए चंद अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में नशा पीड़ित लोगों को न सिर्फ इलाज के नाम पर दूसरी नशीली दवाएं दी जा रही हैं वहीं अनेक नशा मुक्ति केंद्रों में तो उपचाराधीन रोगियों को तरह-तरह से उत्पीड़ित और प्रताडि़त करने की शिकायतें भी मिल रही हैं, जिनमें से पिछले साढ़े चार महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 7 अप्रैल  को ‘लुधियाना’ में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर छापा मार कर अधिकारियों ने अवैध रूप से कैद करके रखे गए 22 मरीजों को मुक्त करवाने के अलावा वहां से एक्सपायर्ड दवाइयां भी बरामद करके केंद्र के संचालक के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
* 13 अप्रैल को ‘किशनगंज’ (बिहार) में परिजनों द्वारा सुधरने के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजे गए ‘मोहम्मद कलाम’ नामक युवक की उक्त केंद्र में भर्ती के मात्र 9 दिनों के भीतर ही मौत हो गई। उसके शव पर बेरहमी से पिटाई के निशान पाए गए, जिस पर मृतक के परिजनों ने अस्पताल परिसर में आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया।
* 17 मई को ‘अमन विहार’ (दिल्ली) में स्थित एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने केंद्र के कर्मचारियों पर युवक को बुरी तरह पीटने और प्रताडि़त करने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
* 19 जून को ‘दुलियाजान’ (असम) में एक नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन ‘अमन सोनार’ नामक युवक की मौत हो गई। मृतक के पूरे शरीर पर चोट के गहरे निशान थे। उसके परिजनों ने केंद्र संचालक ‘संतोष लिम्बू’ के विरुद्ध पीट-पीटकर ‘अमन सोनार’ की बेरहमी से हत्या करने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

* 26 जून को ‘नगांव’ (असम) में एक निजी नशा मुक्ति केंद्र से जान बचा कर निकले मरीजों ने केंद्र के संचालकों पर आरोप लगाया कि इलाज या थैरेपी के नाम पर उनके हाथ-पैर बांधकर घंटों लाठियों से पीटा जाता था। एक पीड़ित के अनुसार, इस प्रताडऩा के दौरान उसके 5 दांत टूट गए। 
* 5 जुलाई को ‘बुराड़ी’ (दिल्ली) में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीज के परिजनों ने केंद्र संचालकों पर मरीज को बंधक बनाकर उससे मारपीट करने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
* 24 जुलाई को ‘देवघर’ (झारखंड) में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती ‘अक्षत केसरी’(14) की मौत के बाद उसके परिजनों ने केंद्र संचालक पर हत्या और प्रताडऩा का आरोप लगाकर सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने नशा मुक्ति केंद्र के संचालक को हिरासत में ले लिया। 

* 5 अगस्त को ‘बेंगलुरु’ के ‘मादनायकानाहल्ली’ में स्थित ‘सन्तृप्ति फाऊंडेशन’ नामक नशा मुक्ति केंद्र के मालिक और 2 कर्मचारियों के विरुद्ध ‘पवन कुमार’ नामक रोगी को बर्बरता से पीटने का मामला दर्ज किया गया।
* 12 अगस्त को ‘उन्नाव’ (गंगाघाट) में एक नशा मुक्ति केंद्र के भीतर मरीज के हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से प्रताडि़त करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस सिलसिले में पीड़ित युवक के पिता की लिखित शिकायत पर पुलिस ने केंद्र के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है।
* 20 अगस्त  को ‘मोगा’ (पंजाब) के ‘डगरू’ स्थित एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन युवक द्वारा केंद्र के संचालक तथा उसके साथी द्वारा मारपीट करने से तंग आकर ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर लेने के सिलसिले में पुलिस ने केंद्र के संचालक को गिरफ्तार किया। 
* 20 अगस्त को ही ‘पीलीभीत’ (उत्तर प्रदेश) स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में ‘लखीमपुर’ के रहने वाले एक मरीज का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकता मिला। 

उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि अवैध रूप से चलाए जा रहे अधिकांश तथाकथित नशामुक्ति केंद्रों में पीड़ितों के इलाज के नाम पर उनको लूटा तथा मानसिक और शारीरिक रूप से उनका शोषण ही किया जा रहा है जिसमें मरीजों की जानें भी जा रही हैं। संबंधित अधिकारियों को ऐसे अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई करके लोगों को इनके शोषण से बचाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी अस्पतालों में नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना और विस्तार किया जाए ताकि इलाज के इच्छुक नशा पीड़ितों का सही इलाज हो सके।—विजय कुमार

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