80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार अपनी विचारधारा ‘सप्तधारा’ में देश के मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर से लेकर कृषि, टैक्नोलॉजी, गति यानी कनैक्टिविटी, डिफैंस, ग्रीन एवं ब्लू इकॉनोमी और सातवें स्तंभ के तौर पर सॉफ्ट स्किल्स का विशेष उल्लेख किया। यह देश के समावेशी विकास में भौतिक एवं आध्यात्मिक संतुलन साधने के लिए प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण का अनूठा संगम है।
सप्तधारा की सातवीं धारा में सॉफ्ट स्किल्स, मैडिटेशन, योग और हीलिंग सीधे व्यक्ति की आंतरिक चेतना और संवेदनशीलता के पोषण पर जोर देती है। जब किसी घर में कोई व्यक्ति उपचारक बन जाता है तो वह न केवल खुद को स्वस्थ रखता है, बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। आध्यात्मिक दक्षता के साथ ‘हर घर हीलर’ मिशन सप्तधारा की अहम कड़ी है, जो एक ऐसे भारत की कल्पना करती है, जहां हर नागरिक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त हो।
होशियारपुर की अमृतम घाटी में मेरे एकांतवास में वसंत की एक सुहानी सुबह थी। जैसे ही मैं शांत स्थिर होकर बैठी, मेरे भीतर एक गहरी हलचल उठी-इतना कुछ होने के बावजूद भी हम कष्ट क्यों सहते हैं? आंतरिक शांति दूर क्यों महसूस होती है? हमारा अपने ही अंतर्मन से संबंध इतना कमजोर क्यों पड़ गया है? मैंने लगभग हर घर में शरीर, दिमाग और दिल का यह मूक संघर्ष देखा है। फिर एक प्रश्न और अधिक तीव्रता से गूंजने लगा। क्या इसे ठीक किया जा सकता है? रेकी ग्रैंड मास्टर के तौर पर 3 दशकों से अधिक समय से मैं हीलिंग के मार्ग पर चलती रही हूं। न केवल एक अभ्यास के रूप में, बल्कि एक जीवंत अनुभव के रूप में और इन वर्षों में एक सच्चाई बार-बार सामने आई है। हीलिंग हमारे बाहर का विषय नहीं है, बल्कि हमारा अंतस्र्वभाव है। प्रत्येक मनुष्य में यह सहज प्रकाश है, फिर भी जीवन की आपाधापी के शोरगुल में हम भूल जाते हैं, भटक जाते हैं, पर हम समाधान बाहर खोजते हैं, जबकि स्रोत चुपचाप भीतर प्रतीक्षा कर रहा है। जैसे ही हम अंदर की ओर मुड़ते हैं, सब कुछ बदल जाता है। मन स्थिर होने लगता है। यह प्रयास से प्रवाह की ओर, भ्रम से स्पष्टता की ओर, अलगाव से जुड़ाव की ओर बढऩे का निमंत्रण है।
हर घर हीलर : हर घर हीलर अभियान प्राचीन आध्यात्मिक विभूतियों से प्रेरित है। यह कालातीत हीलिंग आर्ट में महारत हासिल करने हेतु एक ताजा दृष्टिकोण है। आधुनिक चिकित्सा से बहुत पहले यह एक प्राकृतिक और पवित्र कला के रूप में अस्तित्व में था। भौतिक शरीर से परे, हमारे पास ऊर्जा की सूक्ष्म परतें भी होती हैं। जब यह ऊर्जा सद्भाव में बहती है, तो हीलिंग स्वाभाविक रूप से होती है।
वैदिक उत्पत्ति : ऋग्वेद में संस्कृत में एक श्लोक है-‘ओम् अयं हस्ते, भगवण्यं पुरुष भगवत्रेह, अयं पुरुष विश्वभेषजोयं शिवभिमर्षम्’। इसका भावार्थ यह है कि मेरे हाथ एक दिव्य उपहार हैं, जिसमें उपचार की अपार क्षमताएं हैं। जब घर में एक भी व्यक्ति अपनी उपचारात्मक ऊर्जा को पहचान लेता है, तो पूरा वातावरण बदलना शुरू हो जाता है। अशांति का स्थान शांति ले लेती है। जागरूकता, प्रतिक्रिया का स्थान ले लेती है। करुणा स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होने लगती है। एक जागृत प्राणी में संपूर्ण स्थान को ऊपर उठाने की शक्ति होती है और जब ऐसे कई घर जागृत होने लगते हैं, तो जीवन जीने का एक नया तरीका विकसित होता है। आज के आधुनिक युग में भौतिक सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं। फिर भी, लगभग हर दूसरे घर में कोई न कोई मानसिक तनाव, रिश्तों में कड़वाहट या शारीरिक बीमारियों से जूझ रहा है। इस आंतरिक असंतुलन और ऊर्जा अवरोधों को हल करना और हर परिवार को स्वास्थ्य का कवच प्रदान करना है।
जैसा कि एक सार्वभौमिक नियम है, जहां भी दुख होता है, उसके निवारण का मार्ग भी वहीं से निकलता है। ‘हर घर हीलर’ यानी हर घर में एक उपचारक अभियान, हर परिवार स्वयं को ठीक करने में सक्षम बनाता है। 19 जुलाई से पंजाब के होशियारपुर से शुरू हुए इस अभियान में 100 परिवारों को अब अपना स्वयं का ‘हीलर’ मिल गया है। ध्यान, योग और प्राणायाम के साथ उपचारक पूर्ण क्षमता एवं दक्षता प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास का संकल्प लेते हैं। ‘हर घर हीलर’ अभियान देश में वैलनैस क्रांति की शुरुआत है, जो स्वास्थ्य एवं खुशियों का उजाला पूरी दुनिया में फैलाने में सक्षम है।(लेखिका स्प्रिचुअल-लाइफस्टाइल मैंटर एवं ‘अमृतम’ की संस्थापक हैं)-संगीता मित्तल



















