चीनी के बाद अब प्याज की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 42 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 45 फीसदी ज्यादा है। कई शहरों में कीमतें इससे भी ऊपर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार अब अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने जा रही है। सरकार सोमवार से नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाएगी। इन शहरों में प्याज का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त सप्लाई पहुंचाकर कीमतों पर लगाम लगाई जाए।

दिल्ली में प्याज 65 रुपये किलो, चेन्नई में 58 रुपये

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में शनिवार को प्याज का खुदरा भाव 65 रुपये प्रति किलो रहा। एक साल पहले इसी समय प्याज 35 रुपये किलो बिक रहा था। यानी दिल्ली में कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। चेन्नई में भी प्याज का भाव 58 रुपये किलो पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यहां यह 33 रुपये किलो था। केरल और असम के कुछ हिस्सों में भी प्याज की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री एक साथ बड़ी मात्रा में नहीं की जाएगी। बाजार की स्थिति देखकर चरणबद्ध तरीके से सप्लाई बढ़ाई जाएगी। सरकार को आशंका है कि कुछ कारोबारी कीमतों को कृत्रिम तरीके से ऊपर रखने की कोशिश कर सकते हैं।

क्यों आई प्याज की कीमतों में तेजी?

प्याज की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में कमी की खबर को माना जा रहा है। महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक इस बार वहां खरीफ प्याज का उत्पादन करीब 5 से 7 फीसदी कम रह सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों की मांग पूरी करने के लिए प्याज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। किसानों और सरकारी भंडार दोनों जगह उपलब्धता है।

नाफेड और NCCF खरीद चुकी हैं 1.2 लाख टन प्याज

केंद्र सरकार के पास बफर के लिए प्याज खरीदने की जिम्मेदारी नाफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन यानी NCCF जैसी एजेंसियों की है। चालू वित्त वर्ष में दोनों एजेंसियां करीब 1.2 लाख टन प्याज खरीद चुकी हैं। प्याज की सरकारी खरीद तेज करने के लिए खरीद मूल्य में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मई में नाफेड और NCCF ने प्याज के लिए 1,270 रुपये प्रति क्विंटल का खरीद भाव तय किया था। पिछले सप्ताह इसे बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। सरकार की कोशिश ज्यादा से ज्यादा प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक मजबूत करने की है, ताकि बाजार में कीमत बढ़ने पर जरूरत के हिसाब से प्याज उतारा जा सके।

कुल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं

कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक 2025-26 फसल वर्ष में देश का प्याज उत्पादन करीब 307 लाख टन रहने का अनुमान है। यह 2024-25 के उत्पादन के लगभग बराबर है। यानी कुल उत्पादन के स्तर पर बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में उत्पादन और सप्लाई की स्थिति कीमतों पर असर डाल रही है।

पिछले साल भी चलाई गई थी कांदा एक्सप्रेस

प्याज की कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार पहले भी ‘कांदा एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल कर चुकी है। अक्टूबर 2024 में नासिक से दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों तक प्याज पहुंचाने के लिए ऐसी ट्रेनें चलाई गई थीं। इस बार भी सरकार का फोकस उन शहरों पर है, जहां प्याज का भाव राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। सस्ती सप्लाई पहुंचने से स्थानीय बाजार में कीमतों पर दबाव आने की उम्मीद है।

चीनी के दाम भी बढ़ा रहे हैं परेशानी

रसोई के बजट पर सिर्फ प्याज ही भारी नहीं पड़ रहा। चीनी के खुदरा भाव में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है। शनिवार को खुली चीनी का औसत खुदरा भाव 62.5 रुपये प्रति किलो था। एक महीने पहले यह करीब 46 रुपये किलो था। यानी एक महीने में कीमत लगभग 28.5 फीसदी बढ़ चुकी है। पिछले साल के मुकाबले भी चीनी करीब 34 फीसदी महंगी है। दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव 65 रुपये किलो और मुंबई में 69 रुपये किलो तक पहुंच गया है। हालांकि, खाद्य मंत्रालय का कहना है कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है।

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