शरीर पर तिल (Moles) होना बेहद आम बात है। बचपन से लेकर युवावस्था तक हमारे शरीर पर कई छोटे-छोटे काले या भूरे रंग के तिल निकल आते हैं। ज्यादातर मामलों में ये तिल बिल्कुल सामान्य और बेअसर होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि अचानक कोई नया तिल उभर आया है या फिर सालों पुराना तिल अपना रंग, रूप और आकार बदलने लगा है? कैंसर काउंसिल ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, तिल में आने वाला ऐसा कोई भी अचानक बदलाव सिर्फ एक साधारण बात नहीं है। यह त्वचा के कैंसर यानी मेलेनोमा (Melanoma) का शुरुआती संकेत हो सकता है। ज्यादातर लोग तिल में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। सही समय पर सतर्क होकर त्वचा की जांच कराना ही इससे बचने का सबसे सही तरीका है। आइए समझते हैं कि तिल क्या होते हैं, इनमें बदलाव क्यों आता है और डॉक्टर के पास जाने की जरूरत कब पड़ती है।

तिल (Moles) क्या होते हैं और ये क्यों बनते हैं?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, तिल त्वचा पर बनने वाले छोटे-छोटे धब्बे या उभार होते हैं। हमारी त्वचा में मेलानोसाइट्स (Melanocytes) नाम की कोशिकाएं (Cells) होती हैं, जो हमारी स्किन को रंग देने वाला पिगमेंट बनाती हैं। जब ये कोशिकाएं पूरी त्वचा में फैलने के बजाय एक जगह इकट्ठा हो जाती हैं, तो वहां एक तिल बन जाता है। सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के लगातार संपर्क में रहने से नए तिल बन सकते हैं या पुराने तिलों की रंगत गहरी हो सकती है। बचपन, किशोरावस्था (Puberty) और गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण नए तिल निकल सकते हैं। अगर आपके माता-पिता या परिवार में लोगों के शरीर पर बहुत सारे तिल हैं, तो आपमें भी ज्यादा तिल होने की संभावना बढ़ जाती है।

तिल में कौन-से बदलाव होने पर सावधान रहना चाहिए?

क्लीवलैंड क्लिनिक तिलों में कैंसर के लक्षण पहचानने के लिए एक बहुत ही आसान गाइड ABCDE नियम का इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं;

1.A से Asymmetry (असममित आकार)- एक सामान्य तिल गोल या अंडाकार होता है, जिसे बीच से काटने पर दोनों आधा हिस्सा एक जैसा दिखता है। लेकिन अगर आपके तिल का एक आधा हिस्सा दूसरे आधे हिस्से से बिल्कुल अलग दिखे, तो यह सामान्य नहीं है।

2. B से Border (कटा-फटा किनारा)- सामान्य तिल के किनारे साफ और चिकने होते हैं। अगर तिल का किनारा कटा-फटा, धुंधला, टेढ़ा-मेढ़ा या असमान दिख रहा है, तो ध्यान देने की जरूरत है।

3. C से Color (रंग में बदलाव)- यदि किसी एक ही तिल में कई रंग दिखाई दें जैसे काला, भूरा, गुलाबी, लाल, सफेद या नीला रंग तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है।

4. D से Diameter (बड़ा आकार)- साधारण तिल आकार में छोटे (पेंसिल के पीछे लगे इरेज़र के साइज यानी लगभग 6 मिमी से छोटे) होते हैं। अगर तिल का साइज इससे बड़ा हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच करवाएं।

5. E से Evolving (लगातार बदलना)- यदि समय के साथ तिल का आकार, रंग, मोटाई या रूप बदल रहा है, तो इसे सबसे गंभीर संकेत माना जाता है।

डॉक्टर की सलाह कब लेना बेहद जरूरी है?

हर नया या पुराना तिल कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर आपको अपनी त्वचा पर नीचे बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए किसी डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए;

  • दर्द या खुजली होना।
  • खून या पानी निकलना।
  • उबड़-खाबड़ नया तिल (Ugly Duckling Sign)।
  • 50 से ज्यादा तिल होना।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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