शरीर में बढ़ते खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नियंत्रित करना दिल की सेहत के लिए सबसे जरूरी माना जाता है. लंबे समय से इसके लिए स्टैटिन दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन कई मरीजों में ये दवाएं पूरी तरह कारगर नहीं होतीं. इसी बीच मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने जुलाई 2026 में Merck कंपनी की बनाई दुनिया की पहली ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा लिपफेंड्रा जेनेरिक नाम- Enlicitide को मंजूरी दे दी है. यह दवा रोजाना एक गोली के रूप में ली जाती है और कोलेस्ट्रॉल घटाने के पारंपरिक तरीकों से बिल्कुल अलग है. चलिए जानें.

पारंपरिक स्टैटिन दवाओं से कितनी अलग है यह तकनीक?

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए अब तक दी जाने वाली पारंपरिक दवाएं या स्टैटिन मुख्य रूप से लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को ही धीमा कर देती हैं. इनसे खराब कोलेस्ट्रॉल में करीब 20 से 50 प्रतिशत तक की कमी आती है. हालांकि, कई मरीजों में इससे मांसपेशियों में गंभीर दर्द या लिवर एंजाइम बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. दूसरी ओर, नई ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा लिवर में कोलेस्ट्रॉल का निर्माण रोकने के बजाय, खून में मौजूद पहले से बह रहे खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने की क्षमता बढ़ा देती है. इससे एलडीएल स्तर में 50 से 60 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आती है.

इंजेक्शन के झंझट से मिली मुक्ति

PCSK9 इनहिबिटर तकनीक पहले से मौजूद थी, लेकिन मरीज केवल सुई या इंजेक्शन पर ही निर्भर थे. पुराने PCSK9 इनहिबिटर को हर दो से चार हफ्ते में चमड़ी के नीचे इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचाना पड़ता था. इससे कई बार मरीज को इंजेक्शन लगने वाली जगह पर सूजन, लालिमा या दर्द की शिकायत होती थी. मर्क की लिपफेंड्रा टैबलेट के आने से अब मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने या सुई चुभाने के डर से आजादी मिल गई है. यह रोजाना खाई जाने वाली एक साधारण गोली है, जिसके साइड इफेक्ट्स भी बहुत कम हैं, जैसे हल्का चक्कर आना या पेट खराब होना.

शरीर में कैसे काम करती है यह दवा?

मानव शरीर में लिवर की सतह पर छोटे-छोटे रिसेप्टर्स यानी जालीदार सेंसर्स होते हैं. इनका मुख्य काम खून में बह रहे हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को पकड़कर लिवर के अंदर ले जाना और उसे नष्ट करना है. लेकिन हमारे शरीर में PCSK9 नाम का एक प्राकृतिक प्रोटीन मौजूद होता है, जो इन मददगार सेंसर्स को समय से पहले ही खत्म कर देता है. जब ये सेंसर्स कम हो जाते हैं, तो खून में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है. जब मरीज लिपफेंड्रा गोली खाता है, तो यह आंतों के जरिए अवशोषित होकर सीधे PCSK9 प्रोटीन को निष्क्रिय कर देती है.

कोलेस्ट्रॉल की तेजी से सफाई और बेहतर नतीजे

जैसे ही PCSK9 प्रोटीन ब्लॉक होता है, लिवर की सतह पर मौजूद रिसेप्टर्स पूरी तरह सुरक्षित हो जाते हैं और उनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है. ये मजबूत रिसेप्टर्स खून में फैले खराब कोलेस्ट्रॉल को स्पंज की तरह तेजी से सोख लेते हैं. इसके बाद सारा खराब कोलेस्ट्रॉल लिवर में जाकर पच जाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज बनने का खतरा काफी हद तक टल जाता है. यह पूरा सिस्टम शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को कई गुना मजबूत बना देता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत तेजी से गिरता है.

किन मरीजों के लिए वरदान है दवा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई ओरल दवा दो विशेष प्रकार के मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. पहले वे मरीज जो स्टैटिन इनटोलरेंट हैं, यानी जिन्हें पारंपरिक गोलियां खाने से मांसपेशियों में असहनीय दर्द होता है. दूसरे वे हाई-रिस्क मरीज, जिन्हें पहले कभी दिल का दौरा पड़ चुका है या जो अनुवांशिक बीमारी (HeFH) के कारण जन्मजात हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे हैं. ऐसे मरीज जब स्टैटिन की सबसे तेज खुराक लेते हैं, तब भी उनका कोलेस्ट्रॉल सुरक्षित स्तर पर नहीं आता है. उनके लिए लिपफेंड्रा एक बेहद सुरक्षित और असरदार विकल्प बनकर उभरी है.

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