भारत में 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी और ‘हॉकी के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। आज खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय गौरव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। 

क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, एथलैटिक्स, मुक्केबाजी, निशानेबाजी, भारोत्तोलन और अन्य खेलों में भारतीय खिलाडिय़ों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ओलिम्पिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाडिय़ों की उपलब्धियों ने देश के करोड़ों युवाओं को प्रेरणा दी है। खेलों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। नियमित खेलकूद से आत्मविश्वास बढ़ता है और तनाव कम करने में सहायता मिलती है। खेल व्यक्ति को हार और जीत दोनों को स्वीकार करना सिखाते हैं। मैदान पर मिली हार खिलाड़ी को अगली बार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है। 

आज के डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं का काफी समय मोबाइल फोन, इंटरनैट और वीडियो गेम्स में बीत रहा है। शारीरिक गतिविधियों में कमी स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के लिए चिंता का विषय बन सकती है। ऐसे समय में राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में खेल गतिविधियों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और अंकों की दौड़ तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें खेल मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलना चाहिए।

आवश्यकता इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को सही समय पर पहचान मिले और उन्हें प्रशिक्षक, खेल मैदान, उपकरण तथा आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। जिला और ब्लॉक स्तर पर नियमित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि छोटे गांवों और कस्बों से निकलने वाली प्रतिभाओं को आगे बढऩे का अवसर मिले।सरकार और खेल संस्थाओं की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। प्रतिभावान खिलाडिय़ों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं, पोषण, चिकित्सा सहायता और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। साथ ही खेलों में पारदर्शिता और खिलाडिय़ों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल बड़े शहरों में खेल सुविधाएं विकसित करने की बजाय ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक खेल अधोसंरचना पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय खेल दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि खेलों में सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन, त्याग और निरंतर अभ्यास होता है। मेजर ध्यानचंद का जीवन इसी का उदाहरण है। आज के युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का साधन भी मानना चाहिए।

खेलों के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, समय प्रबंधन और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। ये गुण उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी उपयोगी साबित होते हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल एक दिन खेलों की चर्चा तक सीमित न रहें। विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं में पूरे वर्ष खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। हर बच्चे को कम से कम एक खेल से जुडऩे का अवसर मिले और प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को आगे बढऩे के लिए उचित मंच प्रदान किया जाए। यदि खेल मैदानों को शिक्षा व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाया जाए और गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभाओं को समान अवसर मिले, तो भारत खेलों की दुनिया में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।-प्रो. मनोज डोगरा

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