छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की बिलासपुर स्थित डिवीजन बेंच ने आदिवासी भूमि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर जांच नहीं रोकी जा सकती कि जमीन का रजिस्टर्ड बिक्री विलेख किसी आदिवासी के नाम पर है। यदि जमीन पर वास्तविक कब्जा या उपयोग किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति का पाया जाता है तो राजस्व अधिकारी मामले की जांच कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170-बी का मुख्य उद्देश्य आदिवासी भूमि को ऐसे व्यक्तियों के कब्जे और उपयोग से बचाना है, जो कानूनी रूप से उसके हकदार नहीं हैं। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के 20 मार्च 2024 के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। साथ ही एसडीएम, कलेक्टर और कमिश्नर कोर्ट के आदेशों को भी सही माना।

क्या है पूरा मामला

मामला ग्राम नया बाराद्वार की सर्वे नंबर 665/1 की 0.29 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह जमीन पहले लतीराम और बाद में उनके बेटे धनीराम के नाम दर्ज थी। धनीराम ने 23 मई 1979 को पांच हजार रुपये में यह जमीन आदिवासी समुदाय के फिरतू राम के नाम रजिस्टर्ड बिक्री विलेख के जरिए हस्तांतरित की थी। फिरतू राम की मृत्यु के बाद जमीन गोकुल राम के नाम दर्ज हुई। बाद में उनके कानूनी वारिस इस मामले में अपीलकर्ता बने।

गैर-आदिवासी के कब्जे की शिकायत

जानकी बाई ने धारा 170-बी के तहत शिकायत करते हुए कहा था कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन आदिवासी परिवार के नाम दर्ज होने के बावजूद उसका वास्तविक कब्जा और उपयोग गैर-आदिवासी लखनलाल राठौर के पास है। जांच के बाद एसडीएम ने पटवारी रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जमीन आदिवासी के पक्ष में वापस करने का आदेश दिया था। मामले में कलेक्टर, कमिश्नर और रेवेन्यू बोर्ड के स्तर पर भी आदेशों को बरकरार रखा गया।

केवल रजिस्ट्री को नहीं माना अंतिम आधार

अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि जमीन की रजिस्ट्री आदिवासी के नाम है, इसलिए राजस्व अधिकारी वास्तविक कब्जे की जांच नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि रजिस्टर्ड दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य है, लेकिन धारा 170-बी के तहत जांच पर पूर्ण रोक नहीं लगाता। पटवारी रिपोर्ट, गवाहों के बयान, मकान निर्माण, बिजली कनेक्शन और अन्य परिस्थितियों के आधार पर वास्तविक कब्जे की जांच की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली कनेक्शन या संपत्ति कर भुगतान अपने आप स्वामित्व साबित नहीं करते, लेकिन जमीन के वास्तविक उपयोग और कब्जे की जांच में इन्हें देखा जा सकता है।

आदिवासी भूमि की सुरक्षा कानून का उद्देश्य

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि केवल रजिस्ट्री के आधार पर जांच रोक दी जाए तो आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून का उद्देश्य प्रभावित होगा। कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर राजस्व अधिकारियों के निष्कर्षों को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930