फेस्टिव सीजन के बीच चीनी की कीमतों में आई गिरावट से ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, कीमतें अभी भी एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक हैं। बड़े शहरों में चीनी के रिटेल भाव पिछले 15 दिनों में करीब 10 रुपये प्रति किलो टूट गए हैं। चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी के भाव देश में हालिया तेजी के दौरान 72 रुपये प्रति किलोग्राम तक ऊपर चले गए थे। ये अब 52 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गए हैं। हालांकि, बड़े शहरों में कीमतें 60 रुपये प्रति किलो के आस-पास है।
चीनी की रिटेल कीमतों में गिरावट
बड़े शहरों की बात करें, तो चीनी के दाम इस समय 60 रुपये प्रति किलो के आस-पास हैं। 15 दिन पहले ये कीमतें करीब 70 रुपये प्रति किलो के आस-पास थीं। चीनीमंडी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में शुक्रवार को चीनी का भाव 61 रुपये से घटकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। कानपुर में यह भाव 62 रुपये से गिरकर 60 रुपये प्रति किलो पर आ गया। इसी तरह रायपुर में रेट 62 से घटकर 60 रुपये, मुंबई में 61 से घटकर 60 रुपये, रांची में 61 से घटकर 60 रुपये, कोलकाता में 61 से घटकर 60 रुपये, गुवाहाटी में 62 से घटकर 61 रुपये, हैदराबाद में 61 से घटकर 60 रुपये और चेन्नई में 63 से घटकर 61 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।
चीनी के थोक भाव भी टूटे
चीनी की थोक कीमतों में भी शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में शुक्रवार को चीनी का भाव 5650 रुपये से गिरकर 5350 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। इसी तरह कानपुर में भाव 5650 से घटकर 5400 रुपये, रायपुर में 5300 से गिरकर 4900 रुपये, मुंबई में 5200 से घटकर 4950 रुपये, रांची में 5400 से घटकर 5200 रुपये, कोलकाता में 5400 से गिरकर 5250 रुपये, गुवाहाटी में 5450 से घटकर 5300 रुपये, हैदराबाद में 5300 से गिरकर 5000 रुपये और चेन्नई में भाव 5900 से गिरकर 5500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।
गुड़ की कीमतों में नहीं आ रही कमी
भले ही चीनी की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन गुड़ के भाव में अभी भी तेजी देखी जा रही है। चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, गुड़ की कीमतें 74 रुपये किलो के आसपास बनी हुई हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि चीनी और गुड़ की कीमतों में इतना अंतर आमतौर पर देखने को नहीं मिलता है। ऐसा वर्षों बाद पहली बार देखने को मिला है। सरकार द्वारा किये गए उपायों से चीनी की कीमतें नरम हुई हैं। वहीं, गुड़ की कीमतें मजबूत फेस्टिव डिमांड के चलते उच्च बनी हुई हैं। इंडस्ट्री के अनुसार, कमजोर सप्लाई से ऐसा लगता है कि गुड़ की कीमतें शॉर्ट टर्म में अधिक बनी रह सकती हैं।



















